भोजशाला का निर्णय : केवल एक परिसर नहीं, सांस्कृतिक आत्मा की पुनर्प्रतिष्ठा ✍️ लेखक: राजेश कुमरावत ‘सार्थक’

🚩सदियों के संघर्ष के बाद धार की भोजशाला में गूंजा सांस्कृतिक न्याय का स्वर 🚩जहां कभी गूंजते थे संस्कृत के स्वर, वहां पुनः स्थापित हुई सांस्कृतिक पहचान धार की पावन धरा पर स्थित भोजशाला केवल पत्थरों से निर्मित कोई प्राचीन संरचना नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक स्मृतियों का जीवंत प्रतीक … Continue reading भोजशाला का निर्णय : केवल एक परिसर नहीं, सांस्कृतिक आत्मा की पुनर्प्रतिष्ठा ✍️ लेखक: राजेश कुमरावत ‘सार्थक’