फेसबुक की ‘सच की आवाज़’ से उपजी असली चिंता , सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने वालों के लिए चेतावनी बना यह केस – संपादकीय सार्थक दृष्टिकोण | राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ एक समय था जब कलम और काग़ज़ से सत्य का उद्घोष होता था। आज वह भूमिका स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने ले ली है। पर … Continue reading ‘सच की आवाज़’ या झूठ का शोर? डिजिटल स्वतंत्रता बनाम डिजिटल अराजकता – संपादकीय सार्थक दृष्टिकोण | राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
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