क्या रूढ़ियों की रक्षा ही संस्कृति है? विवेकानंद, नारी स्वतंत्रता और मनुस्मृति पर बड़ा विमर्श

मनुस्मृति के एक श्लोक से शुरू हुई बहस आखिर संस्कृति और रूढ़ि के अंतर तक कैसे पहुंचती है? विवेकानंद के विचार इस पूरे विमर्श को नई दृष्टि देते हैं।