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सनातन समाज में गोमाता जागरूकता का नया अध्याय: एक साल का सतत प्रयास , गाय को राष्ट्रमाता बनाने से पहले उसे निज माता समझें’ – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। गोबर और मिट्टी से निर्मित मकान सभी मौसम में अनुकूल होता है क्योंकि उसमें नमी के अवशोषण करने की क्षमता रहती है और खतरनाक विकिरणों से यह बचाता है । स्वामीजी ने आगे बताया कि अक्षर लोग कहते है कि गाय माता राष्ट्रमाता बने, यह तो होना ही चाहिए लेकिन गायमाता राष्ट्रमाता ही नहीं विश्वमाता हो क्योंकि गावो विश्वस्य मातर : का हमारे धर्म शास्त्रों में भी उल्लेख है लेकिन शुरुआत हमारी निज माता से होनी चाहिए क्योंकि किसी फूल से पैड पैदा नहीं हुआ, जड़ से ही पेड़ बनकर फूल आने के बाद फल लगा है इसलिए गायमाता मेरी माता हो यह पहले निश्चित करूं अर्थात मैं गायमाता को राष्ट्रमाता बनाने के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन तो कर रहा हूं लेकिन कोई पूछे की घर में गाय है तो मे कहूंगा वह तो नहीं है, और दूध ,दही, छाछ, घी भी मै डेयरी का या अन्य किसी पशु भेस, बकरी का उपयोग में ले रहा हूं और हम गायमाता को राष्ट्रमाता का अलाप कर रहें है तो यह ठीक नहीं है ।
उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 275 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने गोबर की महिमा का वर्णन करते हुए आगे बताया कि जब तक कि गाय हमारी माता नहीं है और हम दुनियां की पंचायती करने चले कि गायमाता राष्ट्रमाता बननी चाहिए यह तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति गायमाता को अपनी मां समझने लग जाएं,सबसे पहले अपनी खुद की मां बने जो गोमाता राष्ट्रमाता करने की सोचता है वह सबसे पहले अपने आंगन में एक गायमाता बांधे और वह संकल्प करें कि मैं दूध,दही एवं घी गायमाता का ही लूंगा अन्य किसी पशु मवेशी के दूध ,दही घृत का उपयोग नहीं करूंगा इस प्रकार पहले स्वयं से फिर परिवार से उसके बाद अपने ग्राम ,तहसील,जिला एवं राज्य तक गो माता को अपनी माता मानने का क्रम बनेगा तो गोमाता भारत की ही नहीं अपितु विश्व माता के रूप में स्थापित हो जाएगी ।

गो अभयारण्य में ऋषि परंपरा का दर्शन, गोमाता संरक्षण बना समाज जागरण का आधार :: 275 वें दिवस पर रामकथा वाचक विद्वान पं.,श्याम जी उज्जैन ने अपने उद्बोधन में बताया कि विश्व के इस गो अभयारण्य के दर्शन पाकर साक्षात ऋषि परम्परा के दर्शन का अहसास हुआ । त्रेतायुग से लेकर आज तक राक्षस प्रवृति के रावण जैसों ने सनातन संस्कृति के प्राण गायमाता पर आघात किया है इसलिए सनातन संस्कृति को बचाना है तो भगवती गोमाता का संरक्षण एवं संवर्धन जरूरी है और पूज्य महाराज जी का निरंतर एक वर्ष तक नियमित गोमाता की महिमा सनातन समाज में जनजागृति के एक मिशाल के रूप में कायम होगी । 


⏩ गोविन्द गोशाला बकानी से श्री प्रदीप शृंगी,महेंद्र भंडारी,निलेश सेन, राहुल जुलानिया एवं अमित गुर्जर के साथ गोभक्त एवं चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा से ओमप्रकाश पूरी प्रखंड संयोजक बजरंग दल आदि अतिथि उपस्थित रहें ।


⏩ ग्वालशक्ति सेना के 5000 हजार पूर्ण गोव्रती कार्यकर्ता की टीम का निरन्तर विस्तार हो रहा है जिसमें छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी सत्यव्रत राय को दुर्ग विभाग संयोजक, गौरव गोपाल धौलपुर जिला संयोजक, भगवान सिसोदिया मोखमपुरा,तहसील सह संयोजक सुसनेर,रामप्रसाद दांगी निम्बाहेड़ा
-रायपुर तहसील सह संयोजक,गोरधन सिंह लोगड़ी प्रभारी आदि की ग्वाल शक्ति सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम गोपालगोपाल ब्रह्मचारी जी ने घोषणा कर उपरना पहनाकर बहुमान किया ।

275 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश एवं राजस्थान से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 275 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के करनवास निवासी रामकथा वाचक विद्वान पं.श्याम उज्जैन, पं. अनिल शर्मा नृसिंह गढ़ व राजगढ़ जिले के ही संस्कृत ग्राम झिरी से श्रीमती ब्रजबाला पांडे,कृष्ण बाई,केशर बाई,, लीला बाई एवं मंजू बाई के नेतृत्व में में ग्राम की महिला मंडल व राजस्थान के झालावाड़ जिले की पचपचपहाड़ तहसील के चंद्रपुरा ग्राम की और से श्योदान सिंह,रघुनाथ सिंह,भगवान सिंह,श्योदान सिंह,सज्जन सिंह,नाथू सिंह,उमराव सिंह,विजय सिंह एवं विक्रम सिंह अपने ग्राम की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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