सीमा की रक्षा सैनिक करते हैं, देश की आत्मा की रक्षा परिवार करता है
स्वतंत्रता दिवस : कुटुंब प्रबोधन से राष्ट्र प्रबोधन तक—वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमरावत ने कहा, “कुटुंब जागेगा, समाज जागेगा, राष्ट्र जागेगा”

स्वतंत्रता दिवस : कुटुंब प्रबोधन से राष्ट्र प्रबोधन तक—वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमरावत ने कहा, “कुटुंब जागेगा, समाज जागेगा, राष्ट्र जागेगा”
जनमत जागरण @ सोयतकलां। “आज हम तिरंगे के नीचे खड़े हैं। 1947 में हमारे देश को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली। लाखों लोगों के संघर्ष और असंख्य बलिदानों के बाद भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की। लेकिन क्या स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति का नाम है? हमारे पास अपना संविधान है, अपनी सरकार है, अपना तिरंगा है, लेकिन क्या हमारे परिवार भी मजबूत हैं? क्या हमारी अगली पीढ़ी संस्कारों से जुड़ी है? क्या हमारे बुजुर्ग अपने ही घर में सम्मान और अपनापन महसूस कर रहे हैं?”
“देश की सीमा की रक्षा सैनिक करते हैं, लेकिन देश की आत्मा की रक्षा परिवार करता है। अगर परिवार टूटेगा तो समाज कमजोर होगा और समाज कमजोर होगा तो राष्ट्र कमजोर होगा। इसलिए मजबूत कुटुंब ही मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।”
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नगर परिषद सोयतकलां द्वारा आयोजित मुख्य समारोह में यह बात समारोह के विशेष अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमरावत ने नगरवासियों को संबोधित करते हुए कही। कुटुंब प्रबोधन को स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय भाव से जोड़ते हुए दिया गया उनका यह उद्बोधन समारोह का विशेष आकर्षण रहा।
कुमरावत ने कहा कि आजादी का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त कर लेना नहीं है। स्वतंत्रता की वास्तविक सार्थकता तब है, जब देश का प्रत्येक परिवार मजबूत हो, नई पीढ़ी अपने संस्कारों और संस्कृति से जुड़ी हो तथा बुजुर्गों को परिवार में सम्मान और आत्मीयता मिले। उन्होंने कहा कि परिवार राष्ट्र की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। घर में संस्कार होंगे तो समाज में संस्कार होंगे और संस्कारित समाज ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करेगा।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस को केवल ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के संकल्प का अवसर बनाएं। परिवार के साथ समय बिताने, मोबाइल से कुछ समय दूरी बनाने, माता-पिता और बुजुर्गों को परिवार की धरोहर मानने, बच्चों को शिक्षा के साथ अपने परिवार और राष्ट्र का इतिहास बताने तथा सुख-दुख में परिवार के साथ खड़े रहने का संकल्प लेने की बात कही।
उन्होंने कहा कि “कुटुंब प्रबोधन का पहला विद्यालय हमारा अपना घर है।” जिस परिवार में अपनी परंपराओं, पूर्वजों और राष्ट्रीय जीवन की स्मृतियां जीवित रहती हैं, वहां संस्कार भी जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी को केवल आधुनिक शिक्षा और करियर की जानकारी देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे यह भी बताना जरूरी है कि हमारा परिवार, हमारा समाज और हमारा राष्ट्र किन संघर्षों और त्याग की परंपरा से यहां तक पहुंचा है।
पांच संकल्पों से मजबूत कुटुंब और सशक्त राष्ट्र का आह्वान
समारोह के दौरान कुमरावत ने नागरिकों से पांच संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन परिवार के साथ कुछ समय मोबाइल से दूर बैठें, माता-पिता एवं बुजुर्गों को परिवार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि धरोहर मानें, बच्चों को पढ़ाई और करियर के साथ परिवार एवं राष्ट्र का इतिहास बताएं, संकट और दुख के समय परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहें तथा अपनी संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रीय स्मृतियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।
अपने उद्बोधन के समापन पर उन्होंने उपस्थित नागरिकों से पूरे उत्साह के साथ घोष करवाया—“स्वतंत्र भारत की जय! संस्कारित परिवार की जय! मजबूत कुटुंब की जय! अखंड भारत की जय! भारत माता की जय!” इसके साथ उन्होंने संदेश दिया—“कुटुंब जागेगा—समाज जागेगा—राष्ट्र जागेगा।”
ध्वज पूजन के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ
नगर परिषद सोयतकलां द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह की अध्यक्षता नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती अनुराधा कुंवर जादौन ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वज पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात नगर परिषद अध्यक्ष ने राष्ट्रध्वज का ध्वजारोहण किया। राष्ट्रध्वज फहराते ही उपस्थित नागरिकों ने राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रीय भावना का सम्मान किया।
समारोह में नगर मंडल अध्यक्ष अमित नागर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर बलिदानियों की गाथा सुनाई और उनके त्याग एवं संघर्ष को स्मरण किया। उन्होंने नगर विकास से संबंधित जानकारी भी नागरिकों के समक्ष रखी।

अतिथियों ने भी दी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं
समारोह के विशेष अतिथि गुरु महाराज पूरीलाल विश्वकर्मा तथा पूर्व शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रसाद भावसार ने भी अपने उद्बोधन में नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राष्ट्र की एकता, सामाजिक समरसता और समाज के प्रति नागरिकों के दायित्वों पर विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर अध्यक्ष प्रतिनिधि पुष्करराज सिंह, समस्त पार्षदगण, एल्डरमैनगण, जनप्रतिनिधिगण, मुख्य नगर परिषद अधिकारी मनोज नामदेव, प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारीगण तथा नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
तिरंगे के साथ संस्कारों का भी संकल्प
स्वतंत्रता दिवस समारोह में जहां राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति का भाव दिखाई दिया, वहीं कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवार को राष्ट्र निर्माण की पहली पाठशाला के रूप में देखने का संदेश भी सामने आया।
समारोह का यह संदेश विशेष रूप से रेखांकित हुआ कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमा पर खड़े सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है; राष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक शक्ति को मजबूत रखना प्रत्येक परिवार की जिम्मेदारी है। मजबूत परिवार से मजबूत समाज और मजबूत समाज से सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है।
इसी विचार के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का संदेश “कुटुंब जागेगा—समाज जागेगा—राष्ट्र जागेगा” नागरिकों के बीच पहुंचा और स्वतंत्रता के पर्व को परिवार, संस्कार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया।










