UGC समानता विनियम 2026 के खिलाफ देशभर में उबाल, सोयतकलां में सवर्ण समाज ने पीएम मोदी को सौंपा ज्ञापन

उच्च शिक्षा में बदलाव के नाम पर सामाजिक संतुलन बिगड़ने की आशंका, पुनर्विचार की मांग के साथ लोकतांत्रिक चेतावनी
देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे UGC समानता संदर्भ विनियम 2026 के विरोध ने अब केवल शैक्षणिक बहस नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों से लेकर सड़कों तक और अब प्रधानमंत्री कार्यालय तक, असंतोष की आवाज़ें स्पष्ट रूप से गूंजने लगी हैं। इसी क्रम में मालवा अंचल के सोयतकलां से सवर्ण समाज एकता मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक गंभीर और संवेदनशील ज्ञापन सौंपते हुए चेताया है कि यदि इस विनियम पर पुनर्विचार नहीं हुआ, तो यह कानून सामाजिक समरसता को तोड़ने वाला साबित हो सकता है।
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UGC समानता विनियम 2026 पर देशभर में उबाल, सोयतकलां में सवर्ण समाज ने पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
सोयतकलां | जनमत जागरण
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लागू किए गए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता संदर्भ) विनियम 2026 को लेकर देशभर में बढ़ते असंतोष के बीच अब मालवा अंचल से भी विरोध की सशक्त आवाज़ सामने आई है।
सवर्ण समाज एकता मंच, सोयतकलां (जिला आगर-मालवा) के बैनर तले समाजजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए इस विनियम पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस नए विनियम के लागू होते ही मीडिया, सोशल मीडिया और समाज में असमंजस व अविश्वास का वातावरण बन गया है। समाज का एक बड़ा वर्ग इसे सामाजिक समानता के बजाय सामाजिक विभाजन की दिशा में उठाया गया कदम मान रहा है।
⚠️ भर्ती प्रक्रिया और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
ज्ञापन में चिंता जताई गई है कि पूर्व अनुभवों के आधार पर यह आशंका प्रबल है कि इस तरह के विनियमों के बाद फर्जी नियुक्तियों, योग्यता की अनदेखी, संवैधानिक पदों के दुरुपयोग, और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट
जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
समाज के लोगों का कहना है कि शिक्षा का क्षेत्र प्रयोगशाला नहीं है, जहां बिना व्यापक विमर्श के नीतिगत प्रयोग किए जाएं। यदि शिक्षा कमजोर होगी, तो उसका सीधा असर राष्ट्र के भविष्य पर पड़ेगा।
🗣️ लोकतांत्रिक चेतावनी भी दी
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि समाज की आशंकाओं और मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार नहीं किया गया, तो यह असंतोष आगे चलकर राष्ट्रव्यापी लोकतांत्रिक विरोध का रूप ले सकता है।
यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि नीति की दिशा और परिणामों को लेकर चेतावनी के रूप में बताया गया है।
✍️ प्रधानमंत्री से पुनर्विचार की मांग
सवर्ण समाज एकता मंच ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि
UGC समानता संदर्भ विनियम 2026 को तत्काल प्रभाव से रोका जाए,
सभी समाजों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से व्यापक संवाद किया जाए, और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए, जिससे सामाजिक समरसता, योग्यता और राष्ट्रहित सुरक्षित रह सके।
🖋️ सार्थक चिंतन
“शिक्षा नीति यदि समाज को जोड़ने के बजाय बांटने लगे, तो वह नीति नहीं—चेतावनी बन जाती है।”



