इंदौरइनोवेशन एण्ड यूमध्यप्रदेशस्पेशल रिपोर्ट

“दुनिया ये क्यों चाहिए” म्यूजिक वीडियो लॉन्च: इंदौर के संगीतकार देवेंद्र यादव की संघर्ष और साधना से सजी प्रेरक यात्रा

🎶 इंदौर की संगीत परंपरा में एक और सशक्त स्वर“दुनिया ये क्यों चाहिए” म्यूजिक वीडियो लॉन्चसंघर्ष, साधना और संगीत से गढ़ी देवेंद्र यादव की प्रेरक यात्रा


जनमत जागरण @ इंदौर। माँ अहिल्यादेवी होलकर की पवित्र नगरी इंदौर केवल स्वच्छता की राजधानी ही नहीं, बल्कि संगीत, कला और सृजनात्मक प्रतिभाओं की भूमि के रूप में भी देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। इसी धरती ने लता मंगेशकर, राहत इंदौरी, पलक–पलाश मुच्छल जैसे महान कलाकारों को जन्म दिया, जिन्होंने इंदौर को सांस्कृतिक मानचित्र पर गौरवान्वित किया।
इसी परंपरा की अगली कड़ी के रूप में इंदौर के सिंगर, गीतकार और संगीतकार देवेंद्र यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। उनका नया म्यूजिक वीडियो “दुनिया ये क्यों चाहिए” शीघ्र ही लॉन्च होने जा रहा है। इस गीत को देवेंद्र यादव ने स्वयं लिखा और कंपोज किया है, जिसे अपनी आवाज़ दी है मुंबई के प्लेबैक सिंगर अनीश मैथ्यू ने। यह प्रोजेक्ट उनकी संगीत साधना और रचनात्मक परिपक्वता का सशक्त उदाहरण है।

🎵 मंच से कक्षा तक संगीत की साधना

देवेंद्र यादव संगीत के क्षेत्र में एक उभरते हुए सशक्त हस्ताक्षर हैं। उन्होंने अनेक मंचों पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं के बीच अलग पहचान बनाई है। इसके साथ ही वे वर्तमान में एक सीबीएसई बोर्ड स्कूल में संगीत शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे हजारों विद्यार्थियों को संगीत की विधिवत शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उनके लिए संगीत केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि संस्कार और अनुशासन का माध्यम है।

🕯️ संघर्षों से गढ़ी पहचान

देवेंद्र का संगीत सफर अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा है। मात्र 5 वर्ष की आयु में उनके पिता का कैंसर से निधन हो गया। इसके बाद मां ने कठिन परिस्थितियों में दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया और देवेंद्र को संगीत की ओर प्रेरित किया। यही संगीत आगे चलकर उनके जीवन की आधारशिला बना।
अपने सपनों को साकार करने के लिए देवेंद्र ने साइकिल से अखबार बांटे, इलेक्ट्रिक की दुकान पर काम किया, और उसी सीमित आय से संगीत की शिक्षा ग्रहण की। वे मानते हैं कि संघर्ष ने ही उन्हें संगीत की गहराई समझाई।

🎓 गुरुओं का मार्गदर्शन बना संबल
देवेंद्र के जीवन में उनके शिक्षकों का योगदान उल्लेखनीय रहा है।
सुशांत त्रिवेदी और डॉ. रमेश तागड़े ने उन्हें संगीत की सही दिशा दी।
वहीं डॉ. आनंद मोरे (एचओडी – डीएवीवी कंप्यूटर सेंटर) के सहयोग और प्रोत्साहन से वे एक सशक्त संगीत शिक्षक के रूप में आगे बढ़ सके। देवेंद्र मानते हैं कि सही मार्गदर्शन प्रतिभा को दिशा देता है।

🎼 संगीत को बनाया कॅरियर
देवेंद्र यादव ने संगीत को ही अपना जीवन-पथ चुना है। वर्तमान में वे शिक्षा जगत से जुड़े रहते हुए अपनी संगीत साधना को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि संगीत व्यक्ति को भीतर से संतुलित और संवेदनशील बनाता है।

🏫 म्यूजिक इंस्टिट्यूट खोलने का सपना
देवेंद्र का सपना है कि अधिक से अधिक लोग संगीत से जुड़ें। वे भविष्य में एक म्यूजिक इंस्टिट्यूट स्थापित करना चाहते हैं, जहाँ निःशुल्क संगीत शिक्षा दी जा सके। उनका उद्देश्य है कि किसी अन्य बच्चे को वह संघर्ष न करना पड़े, जो उन्हें करना पड़ा।

📱 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी
देवेंद्र यादव के कई गीत एप्पल म्यूजिक, स्पॉटिफाई, जियो सावन, यूट्यूब और अमेज़न म्यूजिक जैसे प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं। हाल ही में उनके ओरिजिनल गीत “तू इतना ज़रूरी है” और “मुझसे बेहतर” काफी चर्चा में रहे।

🌟 बड़े मंच की तलाश

हालांकि प्रतिभा और मेहनत की उनमें कोई कमी नहीं, फिर भी वे एक बड़े मंच की तलाश में हैं, ताकि अपने संगीत के माध्यम से इंदौर और अपने शैक्षणिक संस्थान का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर सकें।

✍️ सार्थक चिंतन

संघर्ष यदि साधना बन जाए, तो साधारण जीवन भी असाधारण बन सकता है।
संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा की कमी नहीं होती—दृढ़ संकल्प ही असली पूंजी है।
संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को संतुलन और संवेदना देने वाली साधना है।
देवेंद्र यादव की यात्रा बताती है कि निरंतर प्रयास और विश्वास से हर स्वर पहचान बन जाता है।

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