BREAKING | सोयत–माचलपुर रोड विवाद में बड़ा अपडेट – कोर्ट आदेश के बाद किसानों का आक्रोश, सोयत–माचलपुर स्टेट हाईवे रहा पांच घंटे बंद

बिना अधिग्रहण बनी सड़क पर सवाल, 2 फरवरी को राजस्व विभाग ने गठित की जांच टीम
जनमत जागरण @सोयतकलां से निकुंज कुमरावत
विकास की आड़ में यदि कानून और किसानों के अधिकारों की अनदेखी हो, तो उसका विरोध सड़क पर दिखाई देता है।
ऐसा ही दृश्य सोमवार को सोयत–माचलपुर (पचोर) स्टेट हाईवे पर देखने को मिला, जब न्यायालय के आदेश के पालन में किसानों ने अपनी निजी भूमि से गुजर रहे मार्ग को बंद कर दिया। किसानों का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि पर बिना विधिवत अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए और बिना मुआवजा दिए सड़क का निर्माण कर उसका उपयोग किया जा रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार किसानों ने लाखाबीर बालाजी मंदिर गेट के पास सुबह करीब 10 बजे सड़क पर तार की जाली लगाकर कालीसिंध नदी तक सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन रोक दिया। यह चक्का जाम करीब पांच घंटे तक चला, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लंबा चक्कर लगाना पड़ा।
किसानों ने बताया कि इस विषय में उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिस पर 29 जनवरी को आदेश पारित हुआ था। आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि अंतिम निर्णय आने तक वादी पक्ष की भूमि से वाहनों का आवागमन नहीं कराया जाए तथा किसानों को किसी भी प्रकार से परेशान न किया जाए। इसी आदेश के अनुपालन में प्रशासन को पूर्व सूचना देकर मार्ग बंद किया गया।
▪️मार्ग बंद होने की सूचना मिलते ही एसडीओपी देवनारायण यादव, सुसनेर थाना प्रभारी केसर राजपूत, सोयत थाना प्रभारी रामगोपाल वर्मा तथा नायब तहसीलदार राजेश श्रीमाल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। सड़क बंद होने के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी एकत्र हो गए।

2 फरवरी को प्रशासनिक कार्रवाई, टीम गठित कर बनाया गया पंचनामा
इस प्रकरण में सोमवार 2 फरवरी को महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रगति सामने आई। राजस्व विभाग द्वारा मौके पर जांच एवं मुआवजा प्रक्रिया के लिए विधिवत टीम का गठन किया गया। टीम ने संबंधित किसानों की भूमि का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया, जिसमें सड़क निर्माण और भूमि उपयोग की वास्तविक स्थिति दर्ज की गई।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के एसडीओ श्री एम.के. जैन ने पंचनामा पर हस्ताक्षर करते हुए किसानों को लिखित आश्वासन दिया। आश्वासन में यह स्पष्ट किया गया कि किसानों की भूमि से संबंधित अधिग्रहण, सीमांकन और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी तथा न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रशासनिक आश्वासन के बाद किसानों ने दोपहर करीब 3 बजे चक्का जाम समाप्त किया, हालांकि किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना मुआवजा और बिना कानूनी प्रक्रिया उनकी भूमि का उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो वे आगे भी कानूनी और शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।



