गोचर भूमि का ह्रास: क्या गोमाता के लिए सरकार बनाएगी नई नीति? : वनों का नाश और गोमाता की अनदेखी: कौन है जिम्मेदार? स्वामीजी ने उठाए सवाल

▪️गोवंश को घर लाने वाले परिवार को दुगना राशन दे सरकार – स्वामी गोपालानंद सरस्वती
जनमत जागरण @ सुसनेर। गौमाता का असली विचरण क्षेत्र जंगल ही है। वन विभाग की जितनी भी जमीन है हमारे पूर्वजों ने गोमाता के लिए छोड़ी थी, जितनी भी गोचर की जमीन है गाय माता के लिए छोड़ी, नदियों के किनारे जो दूर दूर तक फैली है वह गोमाता के लिए छोड़ी, सरोवर के किनारे, नहरों के किनारे यह सब गोमाता के लिए छोड़े थे लेकिन हम लोगों ने ओर शासन ने कुछ नहीं छोड़ा, सब पर अपना अधिकार जमा लिया। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 283 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने कही।
▪️अंग्रेजों के जमाने में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट बन गए, वन की सभी जमीनों पर वन विभाग ने अपना अधिकार जमा लिया। गोमाता के चरण पड़ने से गोचर जंगल ही था लेकिन व्यवस्था बदलने से धीरे धीरे सब कुछ नष्ट हो रहा है।
▪️कई जगह जंगलों की यह स्थिति है सड़क के किनारे किनारे तो घने पेड़ नजर आते लेकिन 200 मीटर अंदर जाकर देखें तो सब कुछ साफ सिर्फ मैदान नजर आते है, जंगल नष्ट हो रहे है। ओरण, गोचर, वन भूमि सब गोमाता की ही है।
▪️महाराज जी आज कथा में सरकार से निवेदन किया कोई ऐसा नियम बनाए जो सुनी गोमाता को घर पर लाएगा उसे दुगना राशन देंगे। 2 रुपए किलो में उसे बांटे का कट्टा दे देंगे। ऐसा सरकार भी कुछ करे और समाज भी कुछ करे।
⏩ ग्वाल शक्ति सेना में 5 हजार पूर्ण गोव्रती कार्यकर्ताओं की श्रृंखला में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की डूंगला तहसील प्रभारी कृष्णकांत मेनारिया ,आलाखेड़ी प्रभारी नोक लाल मेनारिया, ग्राम चेनपुरिया प्रभारी लक्ष्मीनारायण जी बड़ी सादड़ी, छत्तीसगढ़ शिकारी टोला ग्राम से कृपा राम साहू ढूंढी लहरा तहसील प्रभारी की नियुक्ति की उद्घोषणा हुई ।
⏩ 283 वें दिवस पर बकानी गोशाला के गो सेवक निलेश, अमित गुर्जर, आशीष गणावा, लखन गुर्जर, अंकित टेलर, अंकुश खुशवाह, बलराम भील, बनवारी भील आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ 283 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 283 वें दिवस पर चुनरी यात्रा ने अपने ग्राम की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



