मीडिया को ‘जामवंत’ बन समाज की सुप्त शक्ति जगानी होगी: अमिताभ अग्निहोत्री

देवर्षि नारद जयंती पर “भारतीय मीडिया में स्व का जागरण” विषयक व्याख्यान आयोजित
जनमत जागरण @ इंदौर ।
देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर आयोजित व्याख्यान में प्रख्यात राष्ट्रीय पत्रकार एवं राष्ट्रवाणी चैनल के एडिटर-इन-चीफ श्री अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि आज मीडिया को जामवंत की भूमिका निभाते हुए समाज रूपी हनुमान की सुप्त शक्ति को जागृत करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में स्व बोध, मित्र बोध और शत्रु बोध विकसित नहीं होगा, तब तक राष्ट्र सशक्त नहीं बन सकता।
विश्व संवाद केन्द्र मालवा, इंदौर प्रेस क्लब एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग द्वारा एसजीएसआईटीएस के गोल्डन जुबली सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में वे “भारतीय मीडिया में स्व का जागरण” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
स्व बोध का अभाव बना राष्ट्रीय दुर्बलता का कारण

अग्निहोत्री ने कहा कि बीते दो हजार वर्षों में भारत कई बार खंडित हुआ, जिसका प्रमुख कारण स्व बोध का अभाव रहा। हम न मित्र को पहचान पाए, न शत्रु को। इसी कमजोरी के कारण हमने कई ऐतिहासिक अवसर गंवाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पृथ्वीराज चौहान की पराजय भी शत्रु बोध की कमी का परिणाम थी।
संस्कृति को ‘माइथोलॉजी’ बताना सुनियोजित षड्यंत्र
उन्होंने कहा कि वैदिक वाड्मय और रामायण जैसी महान परंपराओं को ‘माइथोलॉजी’ बताकर भारतीयों के आत्मबल को कमजोर करने का प्रयास किया गया। यह एक सुनियोजित मानसिक आक्रमण था, जिसका प्रभाव आज भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जो ज्ञान हजारों वर्ष पूर्व हमारे पास था, आज विज्ञान भी उसकी पुष्टि कर रहा है।
आस्था केंद्रों पर आक्रमण स्व को कुचलने की रणनीति

अग्निहोत्री ने कहा कि काशी, मथुरा और अयोध्या जैसे आध्यात्मिक केंद्रों पर हमले इसलिए किए गए क्योंकि वे भारतीय चेतना और स्व जागरण के प्रतीक थे। यदि समाज में स्व बोध होता, तो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों का इंतजार नहीं करना पड़ता।
मीडिया की भूमिका: उत्प्रेरक, न कि निर्माता
उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया समाज का दर्पण और उत्प्रेरक है, निर्माता नहीं। समाज ही व्यक्ति निर्माण की टकसाल है—चाहे वह शिक्षक हो, पत्रकार, उद्योगपति या अन्य कोई। यदि समाज में स्व जागृत होगा, तो हर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आएगा।
राम मंदिर पुनरुत्थान से जागा राष्ट्रीय आत्मविश्वास

उन्होंने कहा कि राम मंदिर के पुनरुद्धार ने देश के आत्मबल को पुनर्जीवित किया है। अब समय है कि इस जागरण को व्यापक सामाजिक चेतना में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने कहा कि “अब बौद्धिक युद्ध का समय है” और इसमें मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आत्मबल के लिए ग्रंथों और परंपराओं की पुनर्स्थापना जरूरी
अग्निहोत्री ने कहा कि हमें अपने ग्रंथों, परंपराओं और नायकों को पुनः स्थापित करना होगा। सनातन धर्म को उन्होंने आत्मिक उन्नयन का आधार बताते हुए कहा कि यह एकमात्र ऐसा दर्शन है जिसका न कोई प्रारंभ है, न अंत। भारत की आत्मा सनातन है और वही इसकी पहचान है।
अध्यक्षीय उद्बोधन: ‘स्व बोध’ का केंद्र है मानव का हृदय
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी जयंत भिसे ने कहा कि देवर्षि नारद ने भगवान को मानव के हृदय में स्थान लेने का सुझाव दिया, क्योंकि मनुष्य स्वयं के भीतर झांकने से बचता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने भीतर झांकता है, वही स्व बोध और आनंद को प्राप्त करता है।
कार्यक्रम की झलक
कार्यक्रम का शुभारंभ देवर्षि नारद एवं माता सरस्वती के चित्रों पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। पं. माधव शर्मा ने नारद स्तोत्र का पाठ किया। संचालन सुश्री अनुभूति निगम ने किया, जबकि वंदेमातरम की प्रस्तुति सुश्री जाह्नवी ने दी। आभार प्रदर्शन अरविंद तिवारी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, संपादक, लेखक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



