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गो सम्मान आव्हान अभियान: आगर-मालवा जिले में गूंजा गौ संरक्षण का स्वर, सुसनेर- सोयत कला सहित कई स्थानों पर सौंपे गए प्रार्थना-पत्र

गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग तेज, जिलेभर में संकीर्तन यात्राएं और ज्ञापन अभियान

“गो सम्मान आव्हान अभियान: संस्कृति, संवेदना और संकल्प का संगम”

✍️ भारत की सनातन संस्कृति में गौ केवल एक पशु नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, करुणा और समृद्धि की प्रतीक रही है। वेदों से लेकर पुराणों तक गौ को ‘माता’ का दर्जा देकर समाज ने उसके संरक्षण को अपना नैतिक कर्तव्य माना है। यदि वर्तमान समय में गौ संरक्षण को लेकर ठोस और प्रभावी नीतियां लागू होती हैं, तो यह न केवल सांस्कृतिक अस्मिता को सुदृढ़ करेगा, बल्कि कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।


जनमत जागरण @आगर/ सुसनेर /सोयतकलां नलखेड़ा /बड़ोद

आगर

गो सम्मान आव्हान अभियान के अंतर्गत आगर-मालवा जिले के सुसनेर, नलखेड़ा, बड़ोद, सोयत कला सहित विभिन्न स्थानों पर सामाजिक कार्यकर्ताओं, संत समाज एवं गौ-सेवा से जुड़े नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे गए। अभियान के माध्यम से गौवंश संरक्षण, संवर्धन एवं राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त कानून बनाए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।

सुसनेर में संकीर्तन यात्रा के साथ जागा जनसमर्थन

सुसनेर

गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने एवं गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर ‘गो सम्मान आव्हान अभियान’ के तहत सुसनेर नगर में संतों के सानिध्य में भव्य संकीर्तन प्रार्थना यात्रा निकाली गई। स्थानीय श्री खेडापति हनुमान मंदिर मठ से आकर्षक झांकियों के साथ यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा से पूर्व हनुमानजी का विशेष श्रृंगार कर भक्तों को गो माता के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।नगर में जगह-जगह यात्रा का स्वागत किया गया। भीषण गर्मी के बावजूद गोभक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। इस दौरान नगर एवं प्रतिष्ठानों को बंद रखकर अभियान के समर्थन का संदेश दिया गया। यात्रा उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना पत्र तहसीलदार रामेश्वर दांगी को सौंपा गया। प्रार्थना पत्र का वाचन तहसील प्रभारी वर्षा राठौर द्वारा किया गया, जिसमें गोमाता की सुरक्षा, संवर्धन एवं राष्ट्रीय सम्मान के लिए सशक्त केंद्रीय कानून बनाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।

आगर

ज्ञापन में गोवंश की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि आधुनिकता के दौर में गोमाता उपेक्षा और असुरक्षा का सामना कर रही है, जिसे दूर करने के लिए ठोस कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।अभियान के तहत “गो पालन मंत्रालय” की स्थापना की मांग भी रखी गई, जिससे गौशालाओं के संचालन, गोवंश संरक्षण एवं नस्ल सुधार को संगठित रूप दिया जा सके। साथ ही यह भी बताया गया कि गोवंश ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक खेती का आधार है, जिससे किसानों की आय और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि संभव है।इस अवसर पर संत समाज एवं नागरिकों ने संकल्प लिया कि जब तक गोमाता को राष्ट्रीय दर्जा और पूर्ण सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। कार्यक्रम में महंत रविन्द्रानंद सरस्वती महाराज, दिगम्बर जैन संत मुनि श्री श्रमण सागर जी एवं मुनि श्री ओंकार सागर जी महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सोयतकलां में ज्ञापन सौंपा गया

सोयतकलां

गो सम्मान आव्हान अभियान के अंतर्गत नगर सोयत कला में सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गौ-सेवा से जुड़े नागरिकों द्वारा नगर में वह सम्मान आह्वान अभियान के तहत रेली निकाली गई । माधव चौक में रैली के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना पत्र तहसीलदार राजेश श्री माल को सौंपा गया ज्ञापन में गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, गो माता को राष्ट्रीय माता घोषित करने तथा सशक्त केंद्रीय कानून बनाने की मांग रखी गई। साथ ही निराश्रित गौवंश के लिए चारा-पानी एवं गौशालाओं के बेहतर संचालन की मांग भी प्रशासन के समक्ष रखी गई।इस कार्यक्रम में संत समाज सहित नगर के विभिन्न सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता एवं अन्य संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन माधव चौक में हुआ।इस दौरान कथावाचक आचार्य गोपाल कृष्ण उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में गौ माता की रक्षा का संकल्प दिलाते हुए कहा कि यह केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन के माध्यम से ठोस निर्णय लेने का संदेश दिया।नायब तहसीलदार ने ज्ञापन प्राप्त कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

बडोर


यह अभियान केवल आस्था का नहीं, बल्कि संस्कृति, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के समन्वय का प्रतीक बनकर उभर रहा है, जिसमें समाज का व्यापक समर्थन दिखाई दे रहा है।


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