एकत्व ही हिन्दुत्व का मूल भाव, समाज को सहयोगी नहीं सहभागी बनना होगा: सुनील आम्बेकर

संघ का ध्येय—अच्छा समाज, महान राष्ट्र; पंच परिवर्तन से आएगा व्यापक बदलाव
जनमत जागरण @ इन्दौर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने कहा कि हिन्दुत्व का मूल भाव एकत्व है, जो समाज को जोड़ने का कार्य करता है, न कि विभाजन का। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की पहचान ही हिन्दुत्व से है और इसी सांस्कृतिक आधार पर राष्ट्र का स्वरूप निर्मित हुआ है। अब समय आ गया है कि समाज केवल सहयोगी न रहकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागी बने।
वे रविवार को विजय नगर स्थित जीएसआईएमआर में आयोजित लेखन श्रेणी की प्रमुख जन गोष्ठी में शहर के संपादकों, पत्रकारों, स्तंभकारों, साहित्यकारों और सोशल मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित जन गोष्ठियों की श्रृंखला का हिस्सा है।

आम्बेकर ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल तत्व एकात्मता है—“हम भले ही विविध रूपों में दिखाई देते हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है।” उन्होंने कहा कि हिन्दू विचार में विभाजन का स्थान नहीं है, बल्कि समन्वय और समरसता ही इसकी पहचान है। भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा को हिन्दू समाज की यात्रा बताते हुए उन्होंने कहा कि आज देश और विश्व स्तर पर भारत की इस पहचान को स्वीकार किया जा रहा है।
संघ की सौ वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन ने निरंतर समाज और राष्ट्र निर्माण को ही सर्वोपरि रखा है। “एक छोटे समूह से शुरू हुआ यह कार्य आज व्यापक स्वरूप ले चुका है, लेकिन इसके मूल उद्देश्य और आधार में कोई परिवर्तन नहीं आया है,” उन्होंने कहा। उन्होंने समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों—जैसे युवाओं का मंदिरों की ओर आकर्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति बढ़ती जागरूकता—को इस प्रक्रिया की शुरुआत बताया।
पंच परिवर्तन से होगा समाज का व्यापक रूपांतरण

आम्बेकर ने संघ द्वारा प्रस्तावित पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य—को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इन विषयों पर समाज की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए जातिगत भेदभाव समाप्त करना होगा और सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होगा। पर्यावरण संरक्षण को वैश्विक चुनौती बताते हुए उन्होंने भारतीय जीवनशैली को प्रकृति के अनुरूप बनाने पर बल दिया। “पर्यावरण आधारित जीवनशैली भविष्य की अर्थव्यवस्था को भी दिशा देगी,” उन्होंने कहा।
एसजीएसआईटीएस में आयोजित शैक्षणिक संस्थाओं के संचालकों की गोष्ठी में उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है, जहां भारतीय संस्कृति, परंपरा और दायित्वों का बोध आवश्यक है। वहीं माधव सृष्टि में आईटी संस्थानों की गोष्ठी में उन्होंने स्वदेशी जीवनशैली और आत्मनिर्भरता को राष्ट्र की मजबूती का आधार बताया।
नागरिक कर्तव्य ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला
आम्बेकर ने नागरिक कर्तव्यों को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्वों की समझ और उनका पालन करना चाहिए। “हमारे दैनिक जीवन के आचरण ही राष्ट्र को सशक्त बनाते हैं,” उन्होंने कहा।
कोचिंग संस्थान संचालकों की गोष्ठी में उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ की स्थापना हिन्दू समाज को संगठित कर राष्ट्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से हुई थी। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता, डॉ. हेडगेवार और गुरुजी के चित्र पर माल्यार्पण से हुई तथा समापन वंदे मातरम् के साथ किया गया।



