“गोरक्षा का महासंग्राम: जानिए, स्वामी हरिहर जी ने गोसेवा को क्यों बताया राष्ट्र सेवा?”

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य, मालवा में चल रहे एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव के तृतीय दिवस पर गोरक्षा का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।
स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गोरक्षा शासन का कर्तव्य है, लेकिन जब शासन अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता तो समाज को स्वयं आगे आना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गो रक्षा के नाम पर कुछ असामाजिक तत्व गोरक्षकों को बदनाम करने का कार्य करते हैं। इसलिए सात्विक और निष्ठावान लोगों को संगठित होकर गोरक्षा का कार्य करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 1857 की क्रांति से लेकर अब तक 168 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन गो रक्षा के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। लोकतंत्र में संख्याबल महत्वपूर्ण है, और जिस दिन दिल्ली की सड़कों पर एक करोड़ लोग गो संकीर्तन करेंगे, उसी दिन गोमाता को स्वत: सम्मान मिल जाएगा।
गो सेवा से ही आत्म एवं राष्ट्र कल्याण
उपसंहार उत्सव के तृतीय दिवस पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पूज्य श्री श्री रवि शंकर जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य स्वामी हरिहर जी महाराज ने कहा कि गो अभयारण्य में वास्तविकता को साक्षात देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि गो शब्द के चार अर्थ होते हैं – ज्ञान, गमन, प्राप्ति और मोक्ष। उन्होंने कहा कि जीवन के चार पुरुषार्थ भी गोमाता के साथ जुड़े हुए हैं।
स्वामी हरिहर जी महाराज ने जोर देकर कहा कि गो सेवा से ही आत्म एवं राष्ट्र कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि गाय माता की आराधना करना देव यज्ञ, पितृ यज्ञ, भूत यज्ञ आदि पंच यज्ञों के समान पुण्यदायी है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक तनाव और अवसाद को दूर करने का सबसे श्रेष्ठ साधन गोमाता ही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर से गंभीर बीमारियों का निवारण भी गो सेवा से संभव है। उन्होंने कहा, “गो है तो हम हैं, और गो नहीं है तो सनातन संस्कृति भी नहीं बचेगी।” इस मिशन में आर्ट ऑफ लिविंग भी तन, मन और धन से सहयोग करेगा।
गोरक्षा के संकल्प के साथ चुनरी यात्रा
तीसरे दिन राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से आए गोसेवकों ने भगवती गोमाता के लिए भव्य चुनरी यात्रा निकाली। कथा मंच पर भगवती गोमाता को चुनरी अर्पित कर उनका पूजन किया गया। इसके बाद स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज से आशीर्वाद लिया गया। अंत में गो पूजन, यज्ञशाला की परिक्रमा और गोष्ठ में गो सेवा करने के पश्चात सभी भक्तों ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
शंकराचार्य जी का मिलेगा आशीर्वाद
उपसंहार उत्सव के चतुर्थ दिवस, 2 अप्रैल बुधवार को काशी सुमेरु पीठाधीश्वर परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद जी सरस्वती महाराज का आशीर्वाद प्राप्त होगा।



