गोमाता की सेवा है समाधि का सहज मार्ग: उपसंहार उत्सव में संतों ने दिए प्रेरणादायी

संदेश पथमेड़ा गोधाम में गूँजे संतों के स्वर, गो सेवा को बताया राष्ट्र धर्म
जनमत जागरण @ सुसनेर। मालवा अंचल के ऐतिहासिक श्री कामधेनु गो अभयारण्य में आयोजित एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महोत्सव के उपसंहार उत्सव के एकादश दिवस पर देशभर से पधारे संतों और श्रद्धालु गोभक्तों ने गो सेवा को ईश्वरीय मार्ग बताते हुए गहन संदेश दिए।
स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि “सेवा ही प्रभु प्राप्ति का साधन है और इस युग में गो सेवा सबसे सहज साधना है। जब भाव से की गई सेवा होती है, तब भगवान स्वयं प्रकट होते हैं।”
पंचकुइया धाम, इंदौर के महामंडलेश्वर पूज्य रामगोपाल दास जी महाराज ने गो सेवा का प्रत्यक्ष अनुभव पथमेड़ा में लेने की बात करते हुए कहा, “गाय माता की सेवा AC में बैठकर नहीं होती, जो सेवा यहां हो रही है वह अद्भुत है। किसी को गो सेवा का मर्म समझाना हो, तो पथमेड़ा ले चलना चाहिए।”

दादूधाम नरेना के पीठाधीश्वर पूज्य ओमप्रकाश जी महाराज ने ऐतिहासिक सन्दर्भ जोड़ते हुए कहा कि “जब मुग़ल बादशाह अकबर, संतों के कहने पर गोहत्या रोक सकता है, तो आज के शासक क्यों मौन हैं?” उन्होंने गो सेवकों से एकजुट होकर सरकार से गोमाता को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने का आह्वान किया।
साध्वी शांभवी नाथ, विप्र वैदिक गुरुकुल उज्जैन ने गोमाता को गोकुल जैसा वातावरण देने की बात कही और मातृशक्ति से गो सेवा में अग्रसर होने की अपील की।
इस पावन अवसर पर वल्लभ भाई कथेरिया (पूर्व चेयरमैन, कामधेनु आयोग), दिलीप धनराज गुप्ता (GCCI), राजेश कुमार हरोडे (अधीक्षण यंत्री), ललित पाटीदार (विद्युत विभाग), मनोज तिवारी (गो सेवा संयोजक) समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
राजस्थान और मध्यप्रदेश से पधारे गोभक्तों ने भगवती गोमाता को चुनरी अर्पण कर पूजन किया और स्वामी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। अंत में यज्ञशाला की परिक्रमा, गोशाला सेवा और गोव्रती महाप्रसाद के साथ एकादश दिवस का समापन भावपूर्ण वातावरण में हुआ।



