कृषिआगर मालवादेशब्रेकिंग न्यूजमध्यप्रदेशस्पाट लाइट

MP ब्रेकिंग : नरवाई जलाने पर सख्त प्रशासन: आगर जिले में किसानों की पीएम किसान और मुख्यमंत्री निधि बंद करने की कार्यवाही होगी शुरू?

अब बंद होगी किसान निधि, यदि जलाई नरवाई
– खेतों को बचाइए, नहीं तो सूख जाएगी सरकार की सहायता

जनमत जागरण @ आगर-मालवा ।
प्रकृति की पीड़ा अब सरकारी फाइलों में दर्ज होने लगी है। कलेक्टर श्री राघवेन्द्र सिंह के नेतृत्व में आगर जिले में एक ऐसा कदम उठाया गया है, जो न केवल खेतों की सेहत बचाएगा, बल्कि उन किसानों को चेतावनी देगा जो अपने ही अन्नदाता कर्म को आग में झोंक देते हैं।

जिले के विभिन्न ग्रामों—जमुनिया, परसुलिया खुर्द, देवली, उमरपुर, गढ़ी, ककडेल, डोकरपुरा, बोरखेड़ी आदि—में जिन किसानों ने नरवाई जलाई, उनके विरुद्ध राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों ने मौका मुआयना कर साक्ष्य जुटाए। इन मामलों में पंचनामा तैयार कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।

अब ऐसे सभी कृषकों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से मिलने वाली सालाना सहायता – ₹6000-₹6000 — स्थगित की जाएगी? कृषि उपसंचालक श्री विजय चौरसिया ने स्पष्ट किया कि सेटेलाइट निगरानी और विभागीय निरीक्षण से जिन भी कृषकों द्वारा नरवाई जलाना प्रमाणित होगा, उनके विरुद्ध यही कठोर कार्यवाही दोहराई जाएगी।


सार्थक दृष्टिकोण : आग में जलता अन्नदाता – और उसकी आत्मा

एक ओर हम जैविक खेती की बातें करते हैं, मृदा के जीवंत रहने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी मृदा को अग्नि के हवाले कर देना—ये कैसी विडंबना है? नरवाई जलाना केवल एक परंपरा नहीं, अब यह एक प्राकृतिक अपराध बन चुका है। इससे न केवल खेत की जैविक व्यवस्था, बल्कि उसकी भौतिक एवं रासायनिक संरचना भी नष्ट हो जाती है। ऊपर से वातावरण में जहरीले कणों का विस्फोट – जिसे हम महसूस नहीं करते, लेकिन पीढ़ियाँ भुगतती हैं।

इसलिए सरकार का यह निर्णय महज़ दंड नहीं, एक दिशा है। यह एक ऐसा संकेत है, जिसमें अर्थ छिपा है – पर्यावरण को बचाने में ही किसान का भविष्य सुरक्षित है।
अब समय आ गया है कि हम “आग” से नहीं, “ज्ञान” से खेतों को साफ़ करें। पंचतत्वों से उपजे अन्न को पंचतत्वों में ही संरक्षित रखें, न कि अग्नि में विलीन करें।


यह निर्णय स्वागत योग्य है, और यह संदेश भी – कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकार की नहीं, हर किसान की भी ज़िम्मेदारी है। अब खेतों को जलाने नहीं, संजोने का वक्त है।
– संपादकीय टीम, जनमत जागरण | राजेश कुमरावत ‘सार्थक’


Related Articles

error: Content is protected !!