“कमलेश भाई शास्त्री का संदेश: मुस्कराहट से संवरती है तकदीर, प्रॉपर्टी केवल कागज का टुकड़ा”

सेल्फी की तरह तकदीर भी मांगती है मुस्कराहट : कमलेश भाई शास्त्री
– प्रॉपर्टी सिर्फ कागज का टुकड़ा, जीवन में मस्ती और संतुष्टि जरूरी
जनमत जागरण @ सुसनेर/28 अप्रैल। जनपद सुसनेर की ग्राम पंचायत सालरिया में नव निर्मित शनिदेव एवं नवग्रह मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के षष्ठम दिवस पर कथा प्रवक्ता कमलेश भाई शास्त्री ने जीवन के गहरे सत्य उजागर किए।
उन्होंने कहा कि “जिस प्रकार एक सेल्फी मुस्कराहट मांगती है, उसी प्रकार तकदीर भी मुस्कराहट मांगती है।”
कमलेश भाई शास्त्री ने श्रीनारद भक्ति सूत्र का हवाला देते हुए समझाया कि भगवान न तो बैकुंठ में रहते हैं, न योगियों के हृदय में, बल्कि जहां भक्त आनंद में डूबकर कथा और भगवान का नाम स्मरण करते हैं, वहीं भगवान साक्षात अनुभव होते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे हवा दिखाई नहीं देती फिर भी जीवन के लिए अनिवार्य है, वैसे ही भगवान दिखाई तो नहीं देते, लेकिन उनके बिना जीवन संभव नहीं। परमात्मा का अनुभव सत्संग और कथा पांडालों के माध्यम से होता है।
प्रॉपर्टी केवल कागज का टुकड़ा
शास्त्रीजी ने मानव जीवन की अस्थिरता का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा हो, एक दिन उसे जाना ही है। फिर भी लोग धन, संपत्ति और प्रॉपर्टी के लिए अपनों से ही लड़ाई करते हैं, जबकि प्रॉपर्टी केवल कागज का एक टुकड़ा है, जो सिर्फ नाम बदलने से मालिक बदलता है।
उन्होंने कहा कि धन, सुविधाएं और व्यवस्थाएं जीवन को सुख नहीं देतीं। सुख का आधार मन की संतुष्टि है, न कि बाहरी संपन्नता।
मन से सुंदर होना ज्यादा महत्वपूर्ण
उन्होंने दो प्रकार के इंसानों का उदाहरण देते हुए कहा – एक तन से सुंदर होता है और एक मन से सुंदर। बड़े बंगलों में रहने वालों के दिलों में अक्सर जगह कम होती है, जबकि सड़क किनारे रहने वाले ज्यादा दिलदार होते हैं। बड़े घरों के बाहर ‘कुत्तों से सावधान’ लिखा मिल जाता है, पर दिल में इंसानों के लिए कोई जगह नहीं होती।
मस्ती चाहिए जो जीवनभर रहे
कमलेश भाई शास्त्री ने कहा कि जिंदगी में ऐसी मस्ती चाहिए जो रात को चढ़े और सुबह भी बरकरार रहे। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि “हालात जैसे भी हों, ख्यालात मजबूत रखें। व्यवस्थाएं मिले न मिले, अवस्था मजबूत रहनी चाहिए। फैसले चाहे पक्ष में हों या न हों, हौसले हमेशा अपने पक्ष में रहने चाहिएं।”
प्रण प्रतिष्ठा महोत्सव में 21 कुंडीय महायज्ञ
शनिदेव एवं नवग्रह मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर प्रातः 8 से 11 बजे तक प्रथम पारी और सायंकाल 4 से 6 बजे तक द्वितीय पारी में 21 कुंडीय शिवशक्ति महायज्ञ का आयोजन हुआ।
78 से अधिक यजमान परिवारों ने यज्ञ में भाग लिया। यज्ञाचार्य पंडित केदारदत्त व्यास (हिम्मतगढ़, राजस्थान) और उपाचार्य पंडित मांगीलाल व्यास (सरखेड़ी, राजस्थान) के सान्निध्य में भगवान शनिदेव एवं नवग्रह देवताओं का मृतिका स्नान, वस्त्रादिवास, हवन आदि विधिपूर्वक संपन्न हुआ।



