MP गजब : अब “अस्थायी इलाज” के भरोसे ग्रामीण! 2.43 करोड़ का अस्पताल भवन अब भी बंद 🇨🇭 मोड़ी पीएससी : भवन तैयार, बिजली गायब, इलाज अस्थायी

🇨🇭 कलेक्टर के निर्देश पर सप्ताह में दो दिन सुसनेर से भेजे जा रहे डॉक्टर 🇨🇭 जनमत जागरण की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद बढ़ी प्रशासनिक हलचल
मोड़ी पीएससी : नई बिल्डिंग में बिजली नहीं, स्टॉफ स्वीकृत नहीं, उपस्वास्थ्य केंद्र में सीएचओ का पद भी रिक्त
एक साल पहले हैंडओवर हो चुके 2.43 करोड़ की लागत से बने भवन को अब भी विधिवत शुभारंभ का इंतजार
NEWS FOR ACTION
जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की रिपोर्ट।
आपने अस्थायी सरकार, अस्थायी व्यवस्था और अस्थायी नियुक्तियां तो सुनी होंगी, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में “अस्थायी इलाज” भी शुरू हो गया है। मोड़ी में 2.43 करोड़ की लागत से बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक साल से शुभारंभ का इंतजार कर रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल सप्ताह में दो दिन डॉक्टर भेजकर “अस्थायी स्वास्थ्य सेवा” शुरू की है।
विडंबना यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल की भव्य बिल्डिंग तो बना दी गई, लेकिन उसमें आज तक बिजली की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। स्टॉफ स्वीकृत नहीं हुआ और उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सीएचओ का पद भी रिक्त पड़ा है। ऐसे में ग्रामीणों को अब सप्ताह में केवल दो दिन मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा को ही राहत मानना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के अनुसार मोड़ी पीएससी भवन में अभी बिजली व्यवस्था उपलब्ध नहीं है तथा अस्पताल संचालन के लिए आवश्यक स्टॉफ भी स्वीकृत होकर नहीं आया है। वहीं उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) का स्थानांतरण हो जाने से वह पद भी रिक्त पड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर प्रीति यादव के निर्देश पर सप्ताह में दो दिन डॉक्टर भेजकर उपचार की व्यवस्था की जा रही है।
मोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की विधिवत शुरुआत अभी भी बाकी है। ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से अस्पताल शुरू करने की मांग की जा रही थी। इस संबंध में ग्राम चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर अस्पताल शीघ्र शुरू करवाने की मांग भी की थी।
उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे को लेकर जनमत जागरण न्यूज पोर्टल द्वारा 13 फरवरी 2026 को “2.43 करोड़ का स्वास्थ्य केंद्र एक साल से बंद दरवाजे, जहाँ डॉक्टर आने थे वहाँ उग आई घास” शीर्षक से विशेष ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। रिपोर्ट में मौके पर जाकर करोड़ों की लागत से बने स्वास्थ्य केंद्र के लंबे समय से बंद पड़े रहने, भवन में फैली अव्यवस्थाओं तथा ग्रामीणों को उपचार के लिए दूर-दराज भटकने की मजबूरी को प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ी और अब जिला कलेक्टर के निर्देश पर सप्ताह में दो दिन डॉक्टर भेजकर अस्थायी स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई हैं। हालांकि ग्रामीण अब भी नवीन भवन में नियमित रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan द्वारा जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान ग्राम मोड़ी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की घोषणा की गई थी। इसके बाद वर्ष 2023-24 में लगभग 2 करोड़ 43 lakh रुपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त भवन का निर्माण कराया गया। जनवरी 2025 में ठेकेदार द्वारा भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर भी कर दिया गया था, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अस्पताल भवन शुरू नहीं हो सका है।
स्थिति यह है कि करोड़ों की लागत से तैयार भवन आज भी एक चौकीदार के भरोसे वीरान पड़ा हुआ है। अस्पताल शुरू नहीं होने से मोड़ी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उपचार के लिए 12 से 15 किलोमीटर दूर सुसनेर सिविल अस्पताल जाना पड़ता है, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
“मोड़ी पीएससी भवन में बिजली की व्यवस्था नहीं है। वहां के लिए स्टॉफ भी स्वीकृत होकर नहीं आया है। उपस्वास्थ्य केंद्र में सीएचओ का पद रिक्त है। कलेक्टर के निर्देश पर ग्रामीणों को सुविधा देने के लिए कैम्प मोड़ पर सप्ताह में दो दिन सुसनेर अस्पताल से डॉक्टर भेजकर उपचार किया जा रहा है।”
— डॉ. बी. बी. पाटीदार
प्रभारी बीएमओ, सिविल अस्पताल सुसनेर
“सुसनेर के मोड़ी में 2.43 करोड़ का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक साल से बंद, मरीज 15 किमी दूर जाने को मजबूर”
यह भी पढ़ें -👇
भोजशाला का निर्णय : केवल एक परिसर नहीं, सांस्कृतिक आत्मा की पुनर्प्रतिष्ठा ✍️ लेखक: राजेश कुमरावत ‘सार्थक’



