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“राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों में भारतीय मूल्य और राष्ट्रीय गौरव का भाव जगाती है — जगदीश यादव”

▪️“शिक्षा का असली उद्देश्य: जीवनमूल्य, क्षमता और चरित्र” ▪️“यह विचार बताता है—अंक नहीं, मूल्य महत्वपूर्ण”▪️“जानिए , NEP कैसे भविष्य को नई दिशा देती है”


जनमत जागरण @ जीरापुर : भारतीय शिक्षा प्रणाली तब ही सार्थक बनती है जब वह केवल किताबों के पन्नों में सीमित न रहकर जीवन को दिशा देने वाले मूल्य, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को भी आकार दे। इसी भाव को मूर्त रूप देते हुए आज जीरापुर में रॉयल हाइट्स स्कूल एवं सांदीपनि (सीएम राइस) स्कूल में एक प्रेरक शैक्षिक संवाद का वातावरण बना, जब राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री जगदीश यादव ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के मध्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों और उसकी परिवर्तनकारी दिशा पर सारगर्भित उद्बोधन दिया।

कार्यक्रम में विद्यालयों के शिक्षकगण और छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे तथा उन्होंने पूरे उत्साह और गंभीरता के साथ इस महत्वपूर्ण परिचर्चा में भाग लिया।


NEP: पाठ्यक्रम परिवर्तन नहीं, सोच और व्यक्तित्व का निर्माण

अपने उद्बोधन में श्री यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम बदलने का दस्तावेज नहीं, बल्कि शिक्षा को जीवन की वास्तविक समझ से जोड़ने का राष्ट्रीय प्रयास है।
उन्होंने बताया कि NEP का विज़न ऐसी शिक्षा प्रणाली तैयार करना है जो—

  • भारतीय मूल्यों पर आधारित हो,
  • गुणवत्तापूर्ण और समान अवसर प्रदान करने वाली हो,
  • तथा विद्यार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार कर सके।

उन्होंने यह भी कहा कि यह नीति छात्रों में भारतीयता का गौरव, राष्ट्र के प्रति सम्मान, रचनात्मकता और विश्लेषणात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।


रटने की बजाय कौशल, मूल्य और आत्मविश्वास पर केन्द्रित शिक्षा

श्री यादव ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल 100% अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों को समझना, उन्हें आचरण में लाना, अपनी क्षमताओं को पहचानना और समाज तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है।

NEP छात्रों के सीखने की शैली को अधिक—

  • रुचिकर,
  • कौशल-आधारित,
  • और अनुभवप्रधान

बनाती है, जिससे विद्यार्थी भविष्य में आत्मनिर्भर, सक्षम और सजग नागरिक बन सकें।


शिक्षा को केवल परीक्षा तक सीमित न रखे

अपने समापन संबोधन में श्री यादव ने कहा कि राष्ट्र की प्रगति केवल बड़ी तकनीकों, बड़े ढांचों और आधुनिक संसाधनों से नहीं होती, बल्कि संस्कारवान, जागरूक और मूल्यनिष्ठ नागरिकों से होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि यदि वे शिक्षा को केवल परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय जीवन की यात्रा का साधन मानें, तो वे न केवल स्वयं को बदलेंगे, बल्कि समाज और देश को भी नई दिशा देने वाले शक्तिशाली स्तंभ बनेंगे।


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