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मध्यप्रदेश

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 26 परिशिष्ट 2

26 जनवरी: आज के परिप्रेक्ष्य में एक सार्थक चिंतन— राजेश कुमरावत ‘सार्थक’

26 जनवरी: आज के परिप्रेक्ष्य में एक सार्थक चिंतन
— राजेश कुमरावत ‘सार्थक’


26 जनवरी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की संवैधानिक आत्मा का उत्सव है। आज जब देश वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभा रहा है, तब गणतंत्र दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र की शक्ति केवल सीमाओं की रक्षा में नहीं, बल्कि संविधान, कर्तव्य और चरित्र के संतुलन में निहित है। वर्तमान समय में जब सूचना, तकनीक और विचारधाराओं की तेज़ आँधी है, तब गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय हित में विवेकपूर्ण नागरिकता का आह्वान करता है।

आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है— कर्तव्य-बोध। अधिकारों की चर्चा के साथ-साथ संविधान द्वारा दिए गए कर्तव्यों का पालन, संस्थाओं में विश्वास, और राष्ट्रहित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखना। गणतंत्र दिवस हमें सिखाता है कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं, बल्कि ईमानदार आचरण, सत्यनिष्ठ पत्रकारिता, जिम्मेदार शिक्षा और सामाजिक समरसता से जीवित रहता है।

समाज को दिशा
संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को जीवन में उतारना।
सूचना की जिम्मेदारी समझना: सत्य को पहचानना, अफवाहों से बचना।

राष्ट्र प्रथम की भावना: श्रम, सेवा और स्वावलंबन को प्राथमिकता।
युवा शक्ति का संकल्प: शिक्षा, कौशल और चरित्र निर्माण।
गणतंत्र दिवस का सच्चा उत्सव परेड में नहीं, बल्कि प्रतिदिन के आचरण में दिखाई देता है। जब हर नागरिक अपने हिस्से का कर्तव्य निभाता है, तभी गणतंत्र मजबूत होता है—यही आज का संदेश, यही कल की दिशा।

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