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MP ब्रेकिंग न्यूज़: आगर मालवा के खेत में मिली प्राचीन मूर्ति: क्या यहाँ कभी था प्राचीन मंदिर?

ग्राम नरवल में खेत से निकली प्रतिमा ने बढ़ाई ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की संभावनाएँ

जनमत जागरण @ आगर मालवा। ग्राम नरवल में खेत से प्राचीन मूर्ति मिलने की जानकारी सबसे पहले नरवल निवासी सुरेश शर्मा द्वारा भेजे गए एक वीडियो तथा सुंदर शर्मा की फेसबुक पोस्ट के माध्यम से जनमत जागरण तक पहुँची। सूचना प्राप्त होने के बाद जनमत जागरण ने उपलब्ध फोटो, वीडियो और स्थानीय जानकारियों का अध्ययन किया तथा ग्रामीणों से बातचीत कर पूरे मामले की पड़ताल की। प्रारंभिक तथ्यों के विश्लेषण से यह मामला केवल एक प्राचीन मूर्ति मिलने का नहीं, बल्कि क्षेत्र में संभावित पुरातात्विक धरोहर के अस्तित्व की ओर संकेत करता है।

आगर मालवा जिले के ग्राम नरवल में शनिवार, 5 जुलाई को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने क्षेत्र के इतिहास और पुरातात्विक महत्व को लेकर नई जिज्ञासाएँ खड़ी कर दी हैं। ग्राम निवासी श्री राम/माधवसिंह जी के मालापाड़ा स्थित खेत में बोनी का कार्य चल रहा था। इसी दौरान सीड ड्रिल किसी कठोर वस्तु से टकराई। पहले इसे सामान्य पत्थर समझा गया, लेकिन जब मिट्टी हटाई गई तो उसके भीतर से एक प्राचीन पत्थर की मूर्ति प्राप्त हुई।

यह खोज केवल एक मूर्ति मिलने तक सीमित नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिस स्थान से यह मूर्ति मिली, वहाँ से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक प्राचीन हनुमान मंदिर स्थित है, जिसे स्थानीय लोग ‘ब्रह्माजी तली’ के नाम से जानते हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस स्थान से पूर्व में भी कई खंडित मूर्तियाँ प्राप्त हो चुकी हैं, जो आज भी वहीं सुरक्षित रखी हुई हैं। इतना ही नहीं, इसी क्षेत्र से एक प्राचीन शिलालेख भी मिला था, जिस पर ऐसी लिपि अंकित है जिसे स्थानीय स्तर पर पढ़ा नहीं जा सका है। इन सभी तथ्यों को एक साथ देखने पर यह संभावना प्रबल होती है कि यह पूरा क्षेत्र किसी प्राचीन मंदिर, धार्मिक परिसर अथवा मध्यकालीन बस्ती का हिस्सा रहा होगा।

प्राप्त मूर्ति स्थानीय पत्थर पर उकेरी गई है और समय के प्रभाव से काफी घिस चुकी है। मूर्ति में एक मानवाकृति स्पष्ट दिखाई देती है। सिर पर जटा या मुकुट जैसा उभार दिखाई देता है, जबकि दोनों हाथ सामने की ओर मुड़े हुए हैं। शरीर पर अलंकरण बहुत कम है तथा कमर पर वस्त्र का हल्का संकेत मिलता है। मूर्ति का निचला भाग क्षतिग्रस्त है, जिससे प्रतीत होता है कि यह कभी किसी मंदिर की दीवार, कोटर या चबूतरे पर स्थापित रही होगी।

प्रारंभिक शैलीगत अध्ययन के आधार पर यह प्रतिमा लगभग 8वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य निर्मित प्रतीत होती है। मालवा क्षेत्र में परमार काल तथा उससे पूर्व के समय में इसी प्रकार की सरल और कम अलंकृत मूर्तिकला देखने को मिलती है। हालांकि केवल तस्वीरों के आधार पर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा। इसलिए यह कहना कि यह निश्चित रूप से भगवान शिव की प्रतिमा है, अभी वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

मूर्ति की बनावट को देखते हुए यह संभावना अवश्य बनती है कि यह भगवान शिव के किसी लोक रूप, ग्राम देवता, यक्ष अथवा किसी स्थानीय आराध्य देव की प्रतिमा हो सकती है। इसकी वास्तविक पहचान केवल पुरातत्वविदों द्वारा प्रत्यक्ष परीक्षण, शैलीगत तुलना तथा स्थल के वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही संभव होगी।

इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक ही क्षेत्र से बार-बार प्राचीन मूर्तियों और शिलालेखों का मिलना किसी बड़े पुरातात्विक स्थल की ओर संकेत करता है। यदि भविष्य में इस स्थान का व्यवस्थित सर्वेक्षण अथवा वैज्ञानिक उत्खनन कराया जाता है, तो संभव है कि यहाँ किसी प्राचीन मंदिर, धार्मिक केंद्र या ऐतिहासिक बस्ती के अवशेष प्राप्त हों। इससे मालवा क्षेत्र के इतिहास के अनेक नए अध्याय सामने आ सकते हैं।

ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि इस मूर्ति को सुरक्षित रखा जाए तथा इसे साफ करने के लिए किसी प्रकार के रसायन या पानी का उपयोग न किया जाए। साथ ही इसकी सूचना जिला प्रशासन, राज्य पुरातत्व विभाग तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को दी जानी चाहिए, ताकि विशेषज्ञों द्वारा इसका वैज्ञानिक परीक्षण, संरक्षण और दस्तावेजीकरण किया जा सके।

ग्राम नरवल से प्राप्त यह प्राचीन मूर्ति न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकती है, बल्कि यह मालवा के इतिहास में छिपे उन अध्यायों की ओर भी संकेत करती है जो आज भी धरती की परतों के नीचे दबे हुए हैं। यदि इस क्षेत्र का गंभीर पुरातात्विक अध्ययन किया जाता है, तो संभव है कि आने वाले समय में यह स्थान मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में अपना स्थान बना सके। फिलहाल यह खोज शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बन चुकी है।

✍️ राजेश कुमरावत ‘सार्थक’                          संपादक, जनमत जागरण | वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वतंत्र शोधकर्ता

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