IMG-20260815-WA0013
previous arrow
next arrow
आगर मालवाआस्थाएक सच्ची घटनाब्रेकिंग न्यूजमध्यप्रदेश

MP ब्रेकिंग: राखी बांधने मायके गई बहन से मारपीट, घटना के बाद दोनों पक्ष पुलिस थाने पहुंचे

“राखी की डोर टूटी नहीं…” मारपीट के बाद भी बहन ने भाई को नहीं छोड़ा रिश्तों की मर्यादा का अनोखा संदेश

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन की रिपोर्ट । जिस भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए एक बहन दूर से मायके पहुंचती है, जिस रिश्ते में बचपन की अनगिनत यादें और जीवनभर एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प जुड़ा होता है, उसी पवित्र दिन यदि बहन के साथ मारपीट हो जाए तो यह केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं रह जाता, बल्कि रिश्तों के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़ा करता है। लेकिन इस घटना के बाद जो बात सबसे अधिक मन को छूती है, वह यह है कि प्राप्त सुत्रों के अनुसार चोट और अपमान सहने के बावजूद बहन ने अपने भाई के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया और इसे परिवार का मामला बताते हुए बात को आगे नहीं बढ़ाना चाहा। घटना के बाद दोनों पक्ष पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों का सिविल अस्पताल सुसनेर में मेडिकल परीक्षण कराया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को सुसनेर क्षेत्र निवासी करीब 40 वर्षीय महिला अपने 15 वर्षीय बेटे के साथ अपने मायके में बड़े भाई के घर राखी का त्योहार मनाने पहुंची थी। बताया गया कि परिवार में पहले से चले आ रहे किसी विवाद को लेकर वहां उसके छोटे भाई और भाभी के साथ विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर महिला के साथ मारपीट की गई, जिसमें वह घायल हो गई।

घटना के बाद दोनों पक्ष पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस द्वारा दोनों पक्षों का सिविल अस्पताल सुसनेर में मेडिकल परीक्षण कराया गया। मामले में पुलिस द्वारा जांच की जा रही है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद ससुराल पक्ष से अपने परिचितों को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां उसका उपचार और चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।

बताया गया कि महिला अपने काका की मृत्यु के बाद आने वाले पहले त्योहार पर मायके गई थी। ऐसे भावुक अवसर पर अपने ही भाई के घर हुई मारपीट ने रक्षाबंधन की खुशियों को जरूर प्रभावित किया। हालांकि, इसके बावजूद महिला का मन भाई के प्रति कठोर नहीं हुआ।

यही इस घटना का सबसे संवेदनशील पक्ष है। विवाद अपनी जगह है, चोट अपनी जगह है और कानून अपनी जगह, लेकिन एक बहन के मन में भाई के प्रति वर्षों से बना रिश्ता शायद इन सबसे बड़ा होता है। जिस भाई की कलाई पर राखी बांधने वह घर से निकली थी, उसी भाई के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के बजाय उसने परिवार को बचाने का रास्ता चुना। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

रक्षाबंधन हमें केवल राखी बांधने और मिठाई खिलाने का पर्व नहीं सिखाता, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि रिश्तों में यदि कभी मनमुटाव आ जाए तो उसे अहंकार और क्रोध से नहीं, संवाद और क्षमा से सुलझाने का प्रयास होना चाहिए।

यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी छोड़ती है—क्या पुराने विवाद इतने बड़े हो सकते हैं कि वे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते पर भारी पड़ जाएं?

परिवार में मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन त्योहार हमें रिश्तों को जोड़ने का अवसर देते हैं, तोड़ने का नहीं। आज जरूरत इस बात की है कि ऐसी घटनाओं से परिवार और समाज दोनों सीख लें। क्रोध के कुछ क्षण वर्षों पुराने रिश्तों को चोट पहुंचा सकते हैं, जबकि संयम का एक क्षण पूरे परिवार को टूटने से बचा सकता है।

और इस घटना में सबसे बड़ा संदेश शायद उस बहन के निर्णय में छिपा है—चोट लगने के बाद भी भाई के खिलाफ कार्रवाई न चाहना उसके कमजोर होने का नहीं, बल्कि रिश्ते को बचाए रखने की उसकी भावना और निर्मल मन का परिचायक है।

रक्षाबंधन के दिन हुई यह घटना इसलिए भी विचारणीय है कि राखी की डोर केवल कलाई पर नहीं बंधती, वह दिलों को जोड़ती है। जरूरत है कि उस डोर की मजबूती को क्रोध, अहंकार और पुराने विवादों से कमजोर न होने दिया जाए।

एक ही जिले में रक्षाबंधन की दो तस्वीरें…

एक बहन ने भाई को किडनी देकर जीवन दिया, दूसरी बहन भाई के घर राखी बांधने पहुंची तो घायल हो गई… फिर भी कार्रवाई से इनकार!

रिश्तों की दो तस्वीरें, सवाल एक…
आगर मालवा जिले के सोयतकलां में 1990 में श्यामा जैन ने अपने छोटे भाई जगदीश जैन को किडनी देकर जीवनदान दिया था। वर्षों बाद 2024 में सीमा ने भी अपने भाई गोविंद के लिए यही त्याग दोहराया।

रक्षाबंधन पर जनमत जागरण की यह पुरानी प्रेरणादायी कहानी आज भी भाई-बहन के रिश्ते की गहराई बताती है।
वहीं जिले के सुसनेर में इस रक्षाबंधन पर सामने आई बहन के साथ मारपीट की घटना रिश्तों के दूसरे पक्ष पर सोचने को मजबूर करती है।

एक ओर बहन भाई को जीवन देती है, दूसरी ओर चोट खाने के बाद भी भाई के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहती—आखिर भाई-बहन के रिश्ते की यह डोर कितनी मजबूत है?

🔗 यह भी पढ़ें: सीमा ने अपने भाई गोविंद को किडनी देकर बचाई जिंदगी, अब पहली बार राखी पर फिर से मुस्कराएगा परिवार—सोयतकलां की प्रेरणादायी कहानी

“सीमा ने अपने भाई गोविंद को किडनी देकर बचाई जिंदगी, अब पहली बार राखी पर फिर से मुस्कराएगा परिवार – सोयतकलां की प्रेरणादायी कहानी “

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!