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गो रक्षार्थ हमसे कोई भी झगड़ा करे तो वह झगड़ा हमारे लिए एक स्टार अथवा मेडल है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। सौगंध एवं वचन का पालन क्या होती है इसको चरितार्थ करने वाले वीर पुरुष लोक देवता वीर तेजाजी महाराज का आज निर्वाण दिवस है । नागवंशी क्षत्रिय जाट घराने के एक जाट परिवार में जन्मे वीर तेजाजी सामान्य किसान के बेटे थे. तेजाजी के पिता ताहड़ देव और माता रामकंवरी भगवान शिव के उपासक थे. मान्यता है कि माता रामकंवरी को नाग-देवता के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई थी. जन्म के वक्त तेजाजी की आभा और चेहरे के तेज को देखते हुए उनका नाम तेजा रखा । वीर तेजाजी समाज सेवा व पर पीड़ा, जीव दया और नारी की रक्षा से कभी भी अपने प्राणों की परवाह नहीं की । लाछा गुर्जरी की गायों को बचाने के लिए डाकूओं से लोहा लिया । गायों की रक्षा के लिए जाते वक्त आग में जल रहे सर्प को बचाया तो जोड़े से बिछुड़ जाने के कारण सांप क्रोधित हो गया और तेजाजी को डसने लगा तो तेजाजी महाराज ने नाग देवता को भरोसा दिलाया कि पहले मैं गो की रक्षा कर लेता हूं उसके बाद आप मुझे डस लेना और 300 से अधिक गोधातियो से गोमाताओं को बचाकर तेजाजी महाराज ने नाग देवता को दिए गए वचन का पालन कर आज ही के दिन तेजा दशमी को पुनः गोलोक धाम पधारे । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 158 वें दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

🚩 स्वामीजी ने आगे बताया कि जो कुछ मिल रहा है वह मिथ्या है अर्थात मान सम्मान, यश कीर्ति ,अच्छा, बुरा, विकास, पतन ये सब मिथ्या है, सत्य तो सिर्फ  अपने अन्दर है और वह एक ही है और उसका नाम है ईश्वर और उन तक पहुंचने का एक ही माध्यम है और वह है भगवती गोमाता  और गोमाता की सेवा करते समय अगर कोई बाधा आती है तो वह गो सेवकों के लिए अच्छा संकेत है क्योंकि यहां कोई बाधा या कष्ट गो सेवक को भुगतना पड़ता है तो उसे गो लोक में गोमाता की कृपा से बहुत आनन्द मिलेगा ।  

🚩 गो सेवा करके धरती पर मान सम्मान या सुख पा ले या गोलोक में जगह बना ले। दोनों में से एक ही मिलेगा तो धरती पर तो जैसे तैसे निकल गई और निकल जाएगी,लेकिन गोलोक का आनन्द युगों युगों का है इसलिए अगर मनुष्य लोक में किसी गो सेवक का अनादर या अपमान हो तो समझ लो कि हमने गोलोक में जाने की एक स्टेप को चढ़ लिया है ,अर्थात गो रक्षार्थ हमसे कोई भी झगड़ा करे तो वह झगड़ा गाली गलौच हमारे लिए एक स्टार अथवा मेडल है ।

  • अतिथि :: गोपाल परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार टांक,उनकी अर्धाग्नी श्रीमती अरुणा एवं पुत्र अभिषेक व पुत्रवधू रूपल ने गो कृपा कथा में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया । गोरतलब है कि गोपाल परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सुपुत्र अभिषेक 11जुलाई 2024 से मिनाक्षी मंदिर बेंगलूर से लेह-कश्मीर तक की अकेले पदयात्रा कर रहें है और 09 सितम्बर को महाकाल बाबा की नगरी उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन कर आज 13 सितंबर को एशिया के प्रथम गो अभयारण्य में पंच सहस्त्र से अधिक गोवंश के दर्शन कर गो कृपा कथा में अपनी पद यात्रा के अनुभव सुनाएं । 158 वें दिवस पर श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के न्यासी विक्रम सिंह अध्यापक, सरखेड़ी, चंदर सिंह परिहार नकेसरा (राजगढ),गिरीराज श्रृंगी भवानीमंडी आदि अतिथि उपस्थित रहें ।
158 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से ::  एक वर्षीय गोकृपा कथा के 158 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के कोटा महानगर से  घनश्याम वैष्णव, विष्णु वैष्णव,, ब्रजेश वैष्णव,, राजेन्द्र शर्मा,सुग्रीव वैरागी व चित्तौड़गढ़ जिले की बड़ी सादड़ी तहसील में स्थित  हुराबा गोशाला चेनपुरिया करजू से गोभक्त भूरा बा के नेतृत्व में कमलेश टांक,किशन रैगर, कैलाश सचिव, शंकर सुधार,राजेश माली,प्रहलाद,ललित,भावेश टांक व  श्री कामधेनू गो अभयारण्य मालवा संचालन मंडल के अनिल राजपुरोहित सेवा निवृत पुलिस उपाधीक्षक के  सासू मां श्रीमती कृष्णा कुंवर(मन्दसौर), अर्धाग्नि श्रीमती अनिता राजपुरोहित एवं पुत्रवधू वन्दना राजपुरोहित एवं पौत्र अथर्व उज्जैन  व मध्यप्रदेश के नीमच  जिले की मनासा तहसील के ग्राम अल्हेड  एवं बरथुन से पूज्य स्वामी लक्षानंद जी महाराज के शिष्य प्रकाश पाटीदार, विमल पाटीदार, रोशन पाटीदार,श्रीमती कविता एवं श्रीमती ममता पाटीदार ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर  के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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