यह सच है गोबर छूटा इसका मतलब गोविंद से नाता टूटा – पढ़ें गोवर्धन पूजा पर गोकथा में स्वामी जी ने क्या कहा

⏩ गो नवरात्रि अनुष्ठान के तहत 03 नवम्बर को आयुर्वेद एवं पंचगव्य सम्मेलन का होगा आयोजन - स्वामी गोपालानंद सरस्वती
जनमत जागरण @ सुसनेर। भारत के संग वही है जो गौमाता के संग है। हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता को यदि जीवित रखना है तो गो का सानिध्य लेना बहुत जरूरी है। हम गोमाता के प्रति निष्ठावान रहे तो निश्चित हमारा जुड़ाव अपने राष्ट्र के प्रति रहेगा । आज गोवर्धन का दिवस है दो तरह से हम गोवर्धन का मतलब समझ सकते है। पहला गो के वर्धन का दिवस है, दूसरा गोबर धन मतलब गोबर ही सबसे बड़ा धन है यह समझने का दिवस है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 208 वे दिवस पर श्रोताओं को संबोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज ने कही।
🚩 चाहे आप माला कितनी फेरो, जप कितना ही करो, पूजा करो, बड़े बड़े यज्ञ करो लेकिन यह सच है गोबर छूटा इसका मतलब गोविंद से नाता टूटा। गोमाता का गोबर ही जो हमारे ओर गोविंद के बीच कड़ी बनाने का कार्य करता है। गोबर की महिमा से हमारे धर्म ग्रंथ भरे पड़े है, हमारा आयुर्वेद भरा पड़ा है लेकिन दुखद बात है यह सब पढ़ने ओर समझने का हमारा पास वक्त नहीं है। इसलिए गोबर को हमने बुरी वस्तु बना दिया है। ओर गाय छुटी, गोबर छूटा, गोविंद छूटा इससे बहुत हानि हुई।
⏩ श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के प्रधान संस्थापक एवं संरक्षक गोऋषि स्वामी पूज्य दत्त शरणानन्द जी महाराज एवं केन्द्रीय संरक्षक पूज्य परमहंस प्रज्ञानानंद जी महाराज व राष्ट्रीय संयोजक गोपालानंद सरस्वती जी महाराज की की पावन उपस्थिति में आगर न्यायाधीश भूपेन्द्र सिंह कुशवाह एवं गोपुष्टि यज्ञ के प्रधान यजमान मनमोहन जी मिश्रा मुंबई ने अपने परिवार के साथ गोवर्धन पूजा अर्चना की ओर अन्त में सभी गो भक्तो ने गोवर्धन परिक्रमा कर प्रसाद ग्रहण किया ।

⏩ कार्यक्रम:: गो अभयारण्य में आज प्रातः से गो नवरात्रि महोत्सव प्रारंभ हो गया है,जिसमें प्रतिदिन विभिन्न विषयों पर संगोष्ठी,गो पुष्टि यज्ञ,,गो कृपा कथा एवं रात्रि 8 बजे से 11 बजे तक राम कथा होगी ।

⏩ 208 वे दिवस पर चुनरी यात्रा भूटान,मध्यप्रदेश एवं राजस्थान की और से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 208 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के जिला न्यायाधीश भूपेन्द्र सिंह कुशवाह,,श्रीमती सोनाली सिंह, उनके पिताश्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह एवं सुपुत्र अरिंजय सिंह,एवं आर्यावर्त सिंह व भूटान एवं अजमेर के गो भक्तो की ओर से अपने नगर,राज्य एवं देश के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किय



