भगवती करणी मैया को समर्पित है आज की गो अभयारण्य की ओरण (गोचर) परिक्रमा- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज का दिन बच्चों के प्रति स्नेह और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उनका दृष्टिकोण उन्हें बच्चों के बीच प्रिय बना देता था. उनका मानना था कि बच्चे देश की असली शक्ति हैं और उन्हें प्यार और ध्यान के साथ पोषित किया जाना चाहिए और जहां तक बच्चा वयस्क नहीं हो जाएं वहां तक माताएं अपने बच्चों को मोबाईल से दूर रखे ऐसा पूज्य महाराज जो ने देश की मातृशक्ति से आग्रह किया । पूज्य स्वामीजी ने ओरण परिक्रमा का महत्व बताते हुए कहां कि ओरण परिक्रमा करने से मनुष्य में आध्यात्मिक शक्ति मिलती है. ओरण परिक्रमा, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को की जाती है. ओरण परिक्रमा में, मां करणी की पवित्र ओरण की 12 कौसी (36 किलोमीटर) पैदल परिक्रमा की जाती है.और इस बार विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महोत्सव में भगवती करणी माता यहां विराजित है इसलिए इस बार गोभक्त अभयारण्य क्षेत्र के 16.8 KM ओरण की परिक्रमा करेंगे । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 220 वे दिवस पर स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने कही ।
⏩ स्वामीजी ने बताया कि बालक के पौषण के बारे में बताते हुए कहां कि आजकल की माताएं TV के विज्ञापन के चक्कर में बाजारू फूड पिलाती है जिसके कारण बच्चा प्रारम्भ से ही बीमार रहता है जबकि 06 माह तक तो बच्चों को मां का दूध ही पिलाना चाहिए क्योंकि मां का दूध सबसे सुपाच्य है और मां दूध पिलाने में असमर्थ हो तो फिर उस बच्चे को गायमाता का दुध उसमें बराबर पानी मिलाकर दुध पिलाना चाहिए क्योंकि मां एवं गायमाता के दुध में समान कंटेंट पाएं जाते है ।कुछ लोगों का मंतव्य है कि बच्चों को बकरी का दुध पिलाना चाहिए तो उससे बच्चे में अहम भाव पैदा होता है अर्थात बकरी का बच्चा मैं में बोलता है और मै मैं अहम का प्रतीक होता है उसी प्रकार भैंस का दुध भी बच्चे के लिए ठीक नहीं है, उससे बच्चे में आलसीपन आता है इसलिए बच्चे को बकरी एवं भैंसे का दुध नहीं पिलाना चाहिए । बच्चे के लिए सबसे श्रेष्ठ मां का दुध ही सर्वोत्तम है और मां दूध पिलाने में असमर्थ हो, बीमार हो तो उस परिस्थिति में बच्चे को गाय का दुध पिलाना चाहिए।

⏩ विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में गो कृपा कथा आरती के बाद सायंकाल 04:15 बजे भगवती करणी माता की जय जयकार के साथ श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के राष्ट्रीय संयोजक एवं 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज के सानिध्य में साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती,साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती,साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती,साध्वी निष्टा गोपाल सरस्वती , संत गोबर गोपाल ,बलजीत महाराज, एकलव्य गोपाल, आनन्द महाराज, के महाराज के साथ सेंकड़ों गो भक्त माता बहिनों ,युवाओं एवं वृद्धजनों ने यात्रा में भाग लिया और सभी पदयात्रियों ने सूर्यास्त से पूर्व परिक्रमा मार्ग में प्रसाद ग्रहण किया ।

⏩ 220 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान झालावाड़ एवम् टोंक जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 220 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले की पिडावा तहसील के खैराना ग्राम एवं टोंक जिले के छाण ग्राम की मातृशक्ती ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



