अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

भारत के प्रत्येक सनातनी मंदिर में होनी चाहिए गोशाला – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर, मध्यप्रदेश।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण के उद्देश्य से भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के अंतर्गत जनपद पंचायत सुसनेर के समीपस्थ ग्राम ननोरा, श्यामपुरा, सेमली और सालरिया की सीमा पर स्थापित श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में आयोजित वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 236वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

⏩स्वामी जी ने कहा, “भारत के प्रत्येक सनातनी मंदिर में गोशाला होनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि यदि प्रत्येक मंदिर में गोमाता का घी दीप प्रज्वलित करने के लिए उपयोग हो, तो भारत में एक भी गोमाता निराश्रित नहीं रहेगी। भारत में जितनी गोमाताएं हैं, उनसे कहीं अधिक मंदिर हैं। अगर प्रत्येक मंदिर में एक गोशाला हो, तो दो बड़े लाभ होंगे:1. मंदिर में ठाकुर जी को गोमाता के घृत से दीपक और भोग अर्पित किया जा सकेगा।2. मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भगवती गोमाता की सेवा का अवसर मिलेगा।स्वामी जी ने यह भी कहा कि “बिना गोमाता के कोई भी भगवान नहीं रहते हैं।”

तन और मन की शुद्धि का महत्व :⁠-⁠) स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कथा में आगे तन और मन की शुद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,> “प्रसन्न रहने के लिए मन का पवित्र रहना आवश्यक है। तन का रोग केवल इस लोक को बिगाड़ता है, लेकिन मन का रोग परलोक को भी प्रभावित करता है।”

⏩उन्होंने बच्चों के प्रथम स्नान के लिए एक विशिष्ट विधि बताई। उन्होंने कहा कि तांबे के पात्र में गोमूत्र, हरिद्रा (हल्दी), और नीम के पत्ते डालकर उबाले गए जल से स्नान कराने से बच्चे का भावी जीवन चर्म रोगों से मुक्त रहेगा। साथ ही, गोमूत्र में गंगा मैया का निवास होने से बच्चों को गंगा स्नान का पुण्य भी प्राप्त होगा।

चुनरी यात्रा का आयोजन:⁠-⁠) महामहोत्सव के 236वें दिवस पर चुनरी यात्रा का आयोजन किया गया। राजस्थान के झालावाड़ जिले की गंगधार तहसील के वेरनिया ग्राम की माताओं ने अपने परिवार की ओर से भगवती गोमाता के लिए चुनरी भेंट की।चुनरी यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई, और कथा मंच पर भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाकर उनका पूजन किया गया। स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद सभी भक्तों ने यज्ञशाला की परिक्रमा की और गोसेवा की।

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