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“धरने का सस्पेंस: क्या सात दिन में होगी कार्रवाई, या तहसील बनेगा आंदोलन का अखाड़ा?” – किसानों का अल्टीमेटम: “साहेब, जमीन सोसायटी की है, हम लेंगे वापस !”

◾ मामला संस्था की भूमि पर अवैध कब्जे का : भाजपा के शासन में किसान और भाजपा नेता करेंगे प्रशासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन । ◾ प्रशासन के खिलाफ बिगुल: सोसायटी की जमीन के लिए किसान बनाम कब्जाधारी की जंग !”सोसायटी की जमीन या कब्जाधारी का हक? किसान और भाजपा नेताओ ने ठोका अल्टीमेटम!”

जनमत जागरण @ सोयतकलां । प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था सोयतकलां के किसानों और भाजपा नेताओं ने सोमवार को तहसील कार्यालय पर ऐसा ज्ञापन सौंपा, जो राजस्व विभाग के लिए ‘कुंभकरणी नींद से जागने’ की घंटी साबित हो सकता है। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर सात दिन के भीतर सोसायटी की जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, तो तहसील कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापन देने आए देवीलाल कुशवाहा प्रा. कृषि साख संस्था के पूर्व अध्यक्ष, बाबूलाल दांगी सरपंच वपूर्व जिला मंत्री भाजपा , राजेश राठौर भाजपा मंडल महामंत्री, पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष व सदस्य शिव सिंह गुर्जर , नंदलाल कुशवाहा समिति सदस्य, रोडूलाल राठौर पार्षद पार्षद प्रतिनिधि, मोतीलाल बोहरा व सदस्य आदि किसानों का कहना था, “साहब, ये सरकारी कागजों में लिखी जमीन नहीं, यह किसानो की मेहनत से सिंची हुई धरोहर है। इसे बचाने के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं।” वहीं भाजपा नेता जोश में बोले, “हमारे किसानों की भूमि को यूं ही नहीं हड़पा जा सकता। सात दिन का समय है, क्या सात दिन में होगी कार्रवाई या फिर तहसील बनेगा आंदोलन का अखाड़ा?”

कब्जाधारी और प्रशासन: कौन ज्यादा धीमा?मजे की बात यह है कि यह अवैध कब्जा आज का मुद्दा नहीं है। किसानों और सहकारी संस्था ने कई बार कलेक्टर साहब से लेकर सहकारिता मंत्री तक दस्तक दी, लेकिन राजस्व विभाग की मशीनरी इतनी धीमी है कि घोंघा भी उसे देखकर हंसी रोक नहीं पाता। किसानों का व्यंग्यात्मक कहना है कि “साहब, ये कार्रवाई तो इतनी धीमी हो गई है कि जब तक कब्जा हटेगा, तब तक हमारे पोते इस सोसायटी के सदस्य हो जायेंगे।”

धरना प्रदर्शन की तैयारी: :: किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर इस बार उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे तहसील कार्यालय के सामने ‘नया कुंभ मेला’ लगाएंगे। भाजपा नेता ने कहा, “धरना प्रदर्शन में सिर्फ किसान ही नहीं, पूरे क्षेत्र के किसान आएंगे। हम सिर्फ बैठेंगे नहीं, बल्कि जोरदार आंदोलन करेंगे।”

क्या प्रशासन की रफ्तार तेज होगी ? या फिर किसान और नेता तहसील के सामने ‘संगम’ करेंगे? -: किसानों का यह ज्ञापन न केवल उनकी पीड़ा का प्रतीक है, बल्कि प्रशासन के लिए एक सख्त चेतावनी भी है। अब देखना है कि सात दिन के बाद यह मुद्दा हल होता है या फिर तहसील कार्यालय ‘किसान पंचायत’ का नया केंद्र बनता है।

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