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मालवा की पुण्य भूमि पर गो अभयारण्य में पूज्य मधुसूदन जी महाराज का प्रेरणादायी संदेश

पूज्य संतो के सानिध्य में गोलोक जैसी अनुभूति हो रही है, इस गो अभयारण्य में – स्वामी मधुसूदन महाराज पुष्कर

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 257 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज भारत के एक क्रांतिकारी वीर गेंदालाल जी दीक्षित का निर्वाण दिवस है, जिनको क्रांतिकारी द्रोणाचार्य मानते थे। आगरा मेडिकल कॉलेज में डाक्टरी की पढ़ाई छोड़ कर इटावा जिले की औरैया तहसील में डीएवी स्कूल के हेडमास्टर रहें और शिवाजी समिति के जरिए गुरिल्ला वार के अनोखे प्रयोग किए। ब्रह्मचारी लक्ष्मणानंद के साथ मिलकर चंबल घाटी के दस्यु सरदारों को क्रांति-योद्धा बना दिया।

मालवा की पुण्य भूमि पर गो अभयारण्य में पूज्य मधुसूदन जी महाराज का प्रेरणादायी संदेश :: 
पूज्य मधुसूदन जी महाराज ने वामदेव आश्रम, पुष्कर से अपने 157वें दिवस के आशीर्वचन में मालवा की पुण्य भूमि पर स्थापित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य के दर्शन को अत्यंत सौभाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि इस भूमि पर आकर उन्हें गोलोक की अनुभूति हुई, जो संतों के सानिध्य और मालवा की पुण्यभूमि के उदय के कारण संभव हुआ है।महाराज जी ने इस एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव को भगवती गोमाता की कृपा और सेवा का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति केवल गोमाता की सेवा से ही प्राप्त हो सकती है।उन्होंने सनातन धर्म और गोमाता को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि इनके संरक्षण के लिए आदि गुरु शंकराचार्य, दादू दयाल जी महाराज और वीर तेजाजी महाराज जैसे दिव्य महापुरुषों ने अपने जीवन को न्यौछावर किया। इन महान आत्माओं ने सनातन धर्म की धर्मध्वजा को उठाकर इसे बचाने के लिए अमूल्य योगदान दिया।
पूज्य महाराज जी के इस प्रेरणादायक संदेश से समाज को सनातन धर्म, गोमाता की सेवा और भक्ति का महत्व समझने की दिशा में नई प्रेरणा मिली है।

⏩ 21 दिसंबर 1920 को दिल्ली के एक अस्पताल में गुमनाम रहते हुए अपनी अंतिम यात्रा पर चले गए ।पूज्य स्वामीजी ने निर्गुण एवं सगुण दोनों को समान एवं ब्रह्म तक पहुंचने का एक ही मार्ग बताते हुए कहां कि अगुण एवं सगुण दोनों ब्रह्म ही तो है,लेकिन जहां मैं सही हूं तू गलत है वहां से पतन का मार्ग शुरू हो जाता है और जिस दिन मै गलत हूं बाकि सब सही है यह दिमाग में बैठा लिया उस दिन शोधन संशोधन सब कुछ शुरू हो जाएगा और यह सब प्रेम से ही संभव है और यह प्रेम भगवती गोमाता की सेवा से ही आ सकता है ।

⏩ गो कृपा कथा के 257 वें दिवस पर श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा लोक पुण्यार्थ न्यास के राष्ट्रीय कानूनी सलाहकार श्री कृष्णकांत(मामाजी) व श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के केन्द्रीय निदेशक श्री अम्बालाल सुथार मुख्य अतिथि उपस्थित रहें ।

257 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  राजस्थान के बांसवाड़ा, अजयमेरू एवं झालावाड़ जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 257 वें दिवस पर चुनरी यात्रा  राजस्थान के बागड़ क्षेत्र की गोवर्धन गोशाला तलवाड़ा(बांसवाड़ा) के 51 गौभक्तों का दल जगदीश व्यास, दिनेश त्रिवेदी,प्रकाश भट्ट,अनिल भाई सोनी, शैलेन्द्र व्यास,सुनील व्यास,हरीश सोमपुरा,जगदीश व्यास एवं कांति लाल के नेतृत्व में व अजयमेरू महानगर से जयराम मीणा एवं श्रीमती भगवती देवी,राजेन्द्र कुमार मीणा ,श्रीमती विमला देवी, सत्यप्रकाश  मीणा, श्रीमती संध्या देवी एवं श्रीमती कांता  मीणा एवं झालावाड़ जिले की पिड़ावा तहसील के सेमली भवानी से प्रेमचन्द,कमल,दिनेश,शोभाराम,रामगोपाल,मांगीलाल,सियाराम, राकेश चन्द , माधव , संजय पाटीदार व हरिसिंह, प्रहलाद सिंह सहित ग्राम के युवा एवं मातृशक्ति ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी   लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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