
जनमत जागरण @ सुसनेर।
एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 340वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने सनातन संस्कृति और जाति प्रथा को लेकर महत्वपूर्ण उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि होली अच्छाई की बुराई पर जीत का पर्व है, लेकिन कुछ शक्तियां इसे जातिवाद से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने कहा, “पापियों और धर्मात्माओं की कोई जाति नहीं होती। जो धर्मात्मा हैं, वे सभी एक परिवार के हैं, और जो पापी हैं, वे अपने पापों के कारण नष्ट हो जाते हैं।”
गौसेवा और सनातन रक्षा की दिशा में बड़ा कदम!
गोपाल परिवार संघ द्वारा गठित 12 फाउंडेशनों में से धारा देवी फाउंडेशन और ग्वालशक्ति सेना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए संत गऊ शरणानंद महाराज ने कहा कि इन संस्थानों का लक्ष्य गौमाता को संपूर्ण सुरक्षा, आश्रय, आहार और सम्मान दिलाना है।
उन्होंने कहा कि ग्वाल शक्ति सेना और धेनु शक्ति संघ भारत में गौसेवा का भाव जाग्रत कर जनजागरण और आंदोलन के माध्यम से गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में कार्य करेगा।
वैदिक रीति से हुआ होलिका दहन, चुनरी यात्रा में उमड़ा जनसैलाब!
विश्व के प्रथम गो-अभयारण्य में 14 मार्च को संध्या 5:30 बजे केशव टेकरी पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका दहन किया गया।
340वें दिवस पर पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आई चुनरी यात्रा में जुगल किशोर चांडक, सुशील कुमार चांडक, सुंदरलाल ओझा, मधु देवी चांडक, स्नेहा देवी चांडक, राधिका चांडक सहित कई श्रद्धालु शामिल हुए। उन्होंने भगवती गोमाता को चुनरी अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
संतों का संदेश – सनातन एक परिवार, जाति नहीं कर्म प्रधान!
संतों ने स्पष्ट किया कि जाति जन्म से नहीं, बल्कि कर्मों से बनती है। उन्होंने कहा कि सेवा करने वाले शूद्र, रक्षा करने वाले क्षत्रिय, व्यापार और समृद्धि लाने वाले वैश्य और ज्ञान का प्रकाश देने वाले ब्राह्मण होते हैं।

क्या जाति के नाम पर त्योहारों का बहिष्कार उचित है?
संत गऊ शरणानंद महाराज के इस बयान के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या जातिगत आधार पर होली जैसे त्योहारों का बहिष्कार करना सही है? सनातन धर्म को जोड़ने वाली परंपराओं को तोड़ने का प्रयास क्या किसी गहरी साजिश का हिस्सा है?
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