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झालावाड़: माँ के 60वें जन्मदिवस पर ललित का अमर उपहार : “मरणोपरांत देहदान का संकल्प” पढ़ें – कृतज्ञता का अमर संकल्प लेने वाले की कहानी

जनमत जागरण @ झालावाड़, राजस्थान। हमारे समाज में मृत्यु को एक अंत के रूप में देखा जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे नई शुरुआत का जरिया बना देते हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है झालावाड़ के 30 वर्षीय ललित कुमार सिविल कांट्रेक्टर ने, जिन्होंने अपने मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया है। उनके इस कदम से चिकित्सा अध्ययन को नई दिशा मिलेगी और आने वाली पीढ़ी के डॉक्टर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इसी प्रकार झालावाड़ निवासी शेखरसिंह भाटिया पुत्र प्रवीण सिंह भाटिया ने भी अंगदान की शपथ ली । झालावाड़ चिकित्सा महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर रामसेवक योगी (न्यूरोसर्जन ) ने बताया कि शेखर सिंह भाटिया की माताजी किडनी फेल होने के कारण शांत हो गई थी । माताजी के शांत होने के बाद उन्होंने अंगदान का संकल्प लिया लया ।

👉 ललित का मानवीय कदम :: ललित कुमार पुत्र जमनालाल, ने झालावाड़ चिकित्सा महाविद्यालय को स्वैच्छिक देहदान के लिए अपनी सहमति दी है। उन्होंने अपने होशोहवास में यह शपथ ली कि उनके मृत्यु उपरांत उनका शरीर महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग को चिकित्सा अध्ययन के लिए दान कर दिया जाए। ललित ने यह भी अनुरोध किया कि उनकी मृत्यु के 2 घंटे के भीतर उनका शरीर विभाग तक पहुँचाया जाए।

👉 परिवार का समर्थन, समाज के लिए प्रेरणा :: ललित के इस निर्णय में उनके परिवार ने भी पूरा सहयोग दिया। उनके पिता जमनालाल और माँ संतोष देवी ने उनके इस फैसले का समर्थन करते हुए साक्षी के रूप में हस्ताक्षर किए। यह कदम न केवल चिकित्सा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है।

👉 समाज को नई दिशा देने वाला कदम :: इस स्वैच्छिक देहदान का उद्देश्य केवल चिकित्सा अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने का एक प्रयास भी है। ललित कुमार का कहना है कि “मृत्यु जीवन का अंत नहीं है, बल्कि दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है।” उनका यह कदम यह संदेश देता है कि हर इंसान अपने जीवन के बाद भी समाज के लिए उपयोगी हो सकता है। ललित कुमार ने बताया कि उनके बड़े भाई उत्तराखंड देहरादून में आईपीएस अधिकारी हैं ।

  • 👉 माँ के 60वें जन्मदिवस पर कृतज्ञता का अमर संकल्प :: ललित कुमार ने अपने जीवन के सबसे मानवीय और प्रेरणादायक संकल्प को अपनी माँ के 60वें जन्मदिवस पर समर्पित किया। उन्होंने कहा, “माँ ने मुझे जीवन दिया, और आज उनके जन्मदिवस पर मैं इस जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय ले रहा हूँ—अपने मरणोपरांत देहदान का। यह न केवल मेरी माँ के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, बल्कि समाज के प्रति मेरी जिम्मेदारी का भी एहसास है। उनकी शिक्षा और संस्कारों ने मुझे यह सिखाया है कि जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य दूसरों के लिए उपयोगी बनना है। आज का यह संकल्प मेरी माँ को समर्पित है, जो उनके अमूल्य आशीर्वाद का सम्मान है।”

👉 देहदान: समाज और शिक्षा के लिए अनमोल तोहफा :: झालावाड़ चिकित्सा महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर रामसेवक योगी (न्यूरोसर्जन ) ने ललित कुमार के इस निर्णय की सराहना की है। विभाग ने कहा कि देहदान से मेडिकल छात्रों को वास्तविक शारीरिक संरचना समझने का बेहतर अवसर मिलता है। इससे न केवल छात्रों की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में अनुसंधान और सुधार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

👉 आप भी जुड़ें इस महान कार्य से :: युवा ललित कुमार का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणा है। उनकी तरह आप भी मरणोपरांत देहदान का संकल्प लेकर मानवता की सेवा कर सकते हैं। यह न केवल चिकित्सा क्षेत्र में योगदान देगा, बल्कि आपकी विरासत को अमर बनाएगा।

🙏 हमें गर्व है ललित कुमार पर :: ललित कुमार का यह मानवीय कदम झालावाड़ ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उनके इस निर्णय ने यह साबित कर दिया है कि मानवता की सेवा के लिए जीवन के बाद भी योगदान दिया जा सकता है। ऐसे व्यक्तित्व को नमन!

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