झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने रचा एक और कीर्तिमान, पांच माह के मासूम को मिला नया जीवन

डॉ. रामसेवक योगी की टीम ने फिर रचा इतिहास, जटिल न्यूरो सर्जरी से बचाई मासूम की जान
जनमत जागरण विशेष | झालावाड़ जब संकल्प अटूट हो, विशेषज्ञता उत्कृष्ट हो और सेवा ही सर्वोच्च ध्येय बन जाए, तब कठिन से कठिन चिकित्सा चुनौतियां भी सफलता में बदल जाती हैं। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने पांच माह के मासूम को नया जीवन देकर यही सिद्ध कर दिखाया है।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरजी चिकित्सालय ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए पांच माह के एक मासूम को नया जीवन प्रदान किया है। न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अत्यंत जटिल एवं जोखिमपूर्ण एंडोस्कोपिक सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न कर न केवल अपनी विशेषज्ञता का परिचय दिया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि अब गंभीर से गंभीर बीमारियों का आधुनिक उपचार सरकारी अस्पतालों में भी संभव है।
उल्लेखनीय है कि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग द्वारा पूर्व में भी अनेक जटिल एवं चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं, जिनकी चर्चा पूरे हाड़ौती एवं मालवा अंचल में रही है। इसी कड़ी में पांच माह के मासूम की सफल एंडोस्कोपिक सर्जरी ने एक बार फिर मेडिकल कॉलेज की चिकित्सकीय दक्षता और समर्पण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयतकलां) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी एवं पैरा मिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश दांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी माह में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद परिजनों ने देखा कि एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से नहीं संभाल पा रहा था। कई स्थानों पर परामर्श लेने के बावजूद राहत नहीं मिलने पर परिजन बच्चे को उपचार के लिए झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लेकर पहुंचे।
यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल भर्ती कर विस्तृत जांच करवाई। जांच में सामने आया कि बच्चा हाइड्रोसिफलस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है।
महज पांच माह की आयु में इस बीमारी का उपचार चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति (एंडोस्कोपी) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। अत्यंत सूक्ष्म छिद्र के माध्यम से मस्तिष्क का ऑपरेशन करना जहां न्यूरो सर्जरी टीम के लिए कठिन कार्य था, वहीं इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से एनेस्थीसिया देना भी बड़ी चुनौती थी।
चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट समन्वय से यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ऑपरेशन के बाद बाल रोग विभाग की सतत निगरानी और उपचार के चलते बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है।
15 जून 2026 को भर्ती हुए इस बच्चे का संपूर्ण उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से पूर्णतः निशुल्क किया गया, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली।
परिजनों ने बताया कि जयपुर, दिल्ली और इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे उपचार की आशंका से वे निराश हो चुके थे, लेकिन झालावाड़ मेडिकल College के चिकित्सकों ने न केवल उनके बच्चे को नया जीवन दिया, बल्कि उनके विश्वास को भी पुनर्जीवित किया।
इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव एवं डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटल राज एवं डॉ. संजीव गुप्ता तथा पीडियाट्रिक विभाग से डॉ. राजेंद्र नागर एवं डॉ. हेमाराम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल एवं कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।
माता-पिता ने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए आमजन से सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने की अपील की।



