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गायमाता भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान की कुंजी इसके के बिना हिंदू राष्ट्र की कल्पना अधूरी: स्वामीजी का भावुक आह्वान

कलयुग में गायमाता को मिला चलता-फिरता मंदिर का दर्जा: आचार्य सत्यम द्विवेदी जी का गव्य महत्त्व पर प्रकाश

जनमत जागरण @ सुसनेर। भारतीय संस्कृति ऐसे दौर से गुजर रही है,जिसे बाहरी संस्कृति के साथ साथ अपने ही लोगों से संघर्ष करना पड़ रहा है उसका प्रधान कारण जिससे संस्कृति का पौषण होता है, जिससे संस्कृति को शक्ति प्राप्त होती है,वह शक्ति है गायमाता गोमाता की सतत सेवा,गोमाता की निष्काम सेवा गोमाता के शुभ गव्य पदार्थों का उपयोग आहार, ओषधि, उपासना, अनुष्ठान एवं असुचिता को समाप्त करने आदि के उपयोग करने से स्वत:एक सदविचार की धारा बहेगी जो भारतीय संस्कृति को पुनः अपने मूल एवं वास्तविक स्वरूप तक पहुंचा सकती है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 285 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा। हम लोगों को देश,धर्म,संस्कृति,पहाड़, नदियां, मन्दिर बचाने है तो गायमाता को सबसे पहले बचाना पड़ेगा क्योंकि इन सब की रक्षा गायमाता से ही प्रारम्भ होती है,गायमाता के बिना यह कल्पना करना कि इन सबकी रक्षा हो जाएगी ये तो मात्र ह्रास,परिहास जैसी बात हो जाएगी।

⏩ स्वामीजी ने आगे बताया कि बिना गायमाता के न हम अखण्ड भारत का विचार कर सकते है,बिना गायमाता की सुखद सेवा के बहुत लोगों का सुखद सपना है कि भारत हिन्दू राष्ट्र बनना चाहिए,लेकिन यह सपना उसी दिन पूरा होगा जिस दिन भारत की सड़कों पर एक भी गोवंश निराश्रित नजर नहीं आएगा, सड़क पर तो दिखेगा लेकिन किसी गोपाल,किसी विद्वान,किसी सेठ एवं किसी किसान के हाथ में उसकी रस्सी होगी तब हम भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का विचार कर सकते है। स्वामीजी ने सभी देश वासियों से आह्वान किया कि भारत के प्रत्येक घर ,द्वार में गोमाता की सेवा हो और भारत के हर गांव में एक गोशाला हो ताकि आपात स्थिति में गोमाता की सेवा उन गौशालाओं के माध्यम से हो ।

⏩ भागवत कथा प्रवक्ता पूज्य आचार्य श्री सत्यम द्विवेदी जी ने अपने आशीर्वचन में कहां कि देवताओं की भी देवता जिसमें 33 कोटि देवता विराजते है और हमारे कन्हैया ने तो उनके दूध दही, मक्खन खाकर इस संसार में अनेक लीलाएं की है साथ ही हमारी सनातन संस्कृति में तो पहले गैया मैया को भोग लगाया जाता है उसके बाद ही हम प्रसाद पाते है और कलयुग में तो गायमाता चलता फिरता मंदिर है लेकिन इस कालिकाल में आज वह दर दर की ठोकरें खा रही है।

⏩ एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 285 वें दिवस पर पूज्य स्वामी श्री कृष्णा नन्द जी महाराज चंद्रशेखर महादेव शांतिवन डाबिको इकलेरा झालावाड़,भागवत कथा प्रवक्ता पूज्य आचार्य श्री सत्यम द्विवेदी जी महाराज माता वैष्णो देवी मंदिर के सामने श्री श्यामा श्याम कुंज आश्रम श्री धाम वृन्दावन,पंडित सुमित तिवारी बनारस,पंडित सानू जी कानपुर,मोहन जी,गंगाराम जी विश्वकर्मा नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर मोरूखेड़ी लटूरी सुसनेर आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ ग्वाल शक्ति सेना में 5 हजार पूर्ण गोव्रती कार्यकर्ताओं की श्रृंखला में कोलकाता से श्री सुभाष चौपाल,कोलकाता , श्री बप्पन घोष वर्धमान, बनवारी जी, विन्दायका,जयपुर जिला संयोजक जयपुर ग्रामीण, विमल जी जयपुर शहर जिला संयोजक,मोहित जी तहसील, संयोजक चाकसू, मनीष जी जिला संयोजक, भरतपुर की नियुक्ति की उद्घोषणा हुई ।

285  वे दिवस पर चुनरी यात्रा गुजरात एवं मध्यप्रदेश से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 285  वें दिवस पर चुनरी यात्रा गुजरात के डीसा हुकमाराम चौधरी,मोनाराम चौधरी, बालाराम, मोतीराम गिरधारी राम देसाई एवं मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की सुसनेर तहसील के सोयतकलां कैलाश, सुरेश, घनश्याम,चिंतामन राठौर के परिवार के चिरंजीव भावेश  पुत्र सुमित राठौर के जन्म दिवस पर  कमलेश जी राठौड़,सुरेश राठौर,आयुष राठौर,दिनेश धरना,सीताराम राठौर एवं समर्थन राठौर ने अपने परिवार के साथ सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए 56 भोग एवं   चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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