“बायो-मेडिकल वेस्ट विवाद” – किसने जलाया बायो-वेस्ट? सिविल सर्जन को नोटिस, कार्रवाई की तलवार लटकी!

🔴 बायो-वेस्ट जलाने का पर्दाफाश! सिविल सर्जन को नोटिस, क्या होगी अगली कार्रवाई? 🔴 बायो-मेडिकल वेस्ट को जलाने का मामला, सिविल सर्जन को नोटिस जारी
जनमत जागरण न्यूज नेटवर्क आगर-मालवा । जिले में 30 तारीख को बायो-मेडिकल वेस्ट के अनुचित निस्तारण का मामला सामने आया था। नियमानुसार, बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए एक तय प्रक्रिया होती है, जिसके तहत उसे वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोज किया जाना चाहिए। लेकिन इस प्रक्रिया का पालन किए बिना बायो-वेस्ट को जला दिया गया, जो न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न कर सकता है।

🛑 पुरानी रिपोर्टिंग से खुलासा :: इससे पहले भी जिले में मेडिकल वेस्ट के अनुचित निस्तारण को लेकर सवाल उठ चुके हैं। विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों और पर्यावरणविदों ने कई बार इस पर आपत्ति जताई है कि बायो-मेडिकल वेस्ट का सही प्रबंधन न होने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी कड़ी में 30 तारीख को सामने आए इस मामले ने फिर से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

🛑 सिविल सर्जन को नोटिस, जवाब का इंतजार :: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि इस लापरवाही के संबंध में सिविल सर्जन डॉ. शशांक सक्सेना को नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, अभी तक नोटिस का जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
🛑CMHO डॉ. गुप्ता ने कहा:“बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की एक विधिवत प्रक्रिया होती है, जिसे अपनाना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बायो-वेस्ट को जला दिया गया। इस संबंध में सिविल सर्जन को नोटिस जारी किया गया है, और उनके जवाब के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

🛑बायो-मेडिकल वेस्ट जलाना कितना खतरनाक?:: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बायो-मेडिकल वेस्ट को जलाने से हानिकारक डाइऑक्सिन और फ्यूरान गैसें उत्पन्न होती हैं, जो हवा में मिलकर फेफड़ों की बीमारियां, त्वचा रोग और कैंसर जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। यही कारण है कि सरकार ने इसके सुरक्षित निस्तारण के लिए बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 लागू किए हैं, जिनका पालन करना हर स्वास्थ्य संस्था के लिए अनिवार्य है।

🛑 आगे की कार्रवाई क्या होगी? –स्वास्थ्य विभाग इस मामले में सिविल सर्जन से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करेगा। यदि लापरवाही की पुष्टि होती है, तो प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमों के तहत दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और जिले में मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है।



