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“क्या पत्रकारिता लोकतंत्र को संभाल पाएगी? जानिए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती का संदेश”

"क्या मातृशक्ति ही दिलाएगी गोमाता को सर्वोच्च स्थान?" --दाता देवी फाउंडेशन की प्रमुख साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती ने कहा 

जनमत जागरण DRAMA@ सुसनेर | वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 329वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के मूल स्तंभ होते हैं, लेकिन वर्तमान समय में लोकतंत्र लंगड़ाता हुआ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को मिर्च-मसाले वाली खबरों से बचकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करना चाहिए।

स्वामी जी ने कहा कि आज पत्रकारिता का दायित्व केवल सनसनीखेज या त्वरित वायरल होने वाली खबरों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, मीडिया को राष्ट्र की संस्कृति, गोमाता की महिमा और समाज में शांति व सद्भावना को बढ़ावा देने के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि पत्रकार अपने वास्तविक कर्तव्यों को समझ लें और जनहित की पत्रकारिता करें, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

स्वामी जी ने कहा कि आज गोमाता को केवल दूध देने वाला पशु मान लिया गया है, जो एक बड़ी भूल है। यह मानसिकता ही विश्व अशांति का कारण बन रही है। उन्होंने बताया कि जब मानव अपने कर्तव्यों को समझेगा, तो अधिकारों के लिए होने वाले संघर्ष स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

मातृशक्ति की भूमिका होगी निर्णायक :: दाता देवी फाउंडेशन की प्रमुख साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती ने कहा कि भारत में करपात्री जी महाराज से लेकर आज तक कई गौ रक्षा आंदोलन हुए, लेकिन दुर्भाग्यवश सभी प्रयास असफल रहे। उन्होंने चिंता जताई कि आज भी प्रतिदिन 80,000 गोमाता का वध किया जा रहा है। इस स्थिति को बदलने के लिए अब मातृशक्ति को आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि गायमाता शक्ति का प्रतीक है, और यह कार्य भी शक्ति स्वरूपा नारी के नेतृत्व में ही सफल हो सकता है। नारी त्याग, ममता और बलिदान की प्रतिमूर्ति होती है, और इतिहास गवाह है कि जब भी कोई बड़ा परिवर्तन हुआ है, उसमें मातृशक्ति की अहम भूमिका रही है। झांसी की रानी, सरोजिनी नायडू, और कोरोना वैक्सीन निर्माता सुचित्रा जी जैसे उदाहरणों का जिक्र करते हुए साध्वी जी ने कहा कि यदि महिलाएं ठान लें, तो गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना संभव हो सकता है।

“धेनु शक्ति संघ” के माध्यम से अभियान :: साध्वी श्रद्धा गोपाल सरस्वती ने कहा कि गोमाता को मूलभूत सात आवश्यकताएँ – आहार, आश्रय, औषधि, आदर, आजादी, आनंद एवं आलिंगन – की पूर्ति के लिए मातृशक्ति को संगठित होना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि 10 लाख महिलाएं एकजुट होकर गोमाता के सम्मान के लिए खड़ी हो जाएं, तो गाय को राष्ट्रमाता का सर्वोच्च स्थान दिलाने का सपना साकार हो सकता है।

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए “धेनु शक्ति संघ” सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है और माताओं एवं बहनों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान कर रहा है। साध्वी जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि मातृशक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और गोमाता की रक्षा के लिए आंदोलन का नेतृत्व करे।

⏩ 329 वें दिवस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली,सेवा निवृत DSP महेन्द्र सिंह जी यादव गुरुग्राम, ब्रजेश कुमार जी अग्रवाल,चार्टेड अकाउंटेट गुरुग्राम, डॉ. महेंद्र प्रसाद जी अग्रवाल,यमुना नगर हरियाणा,बृजपाल जी नेगी,श्याम विहार नई दिल्ली,बीरबल जी यादव,नई दिल्ली,छत्तीसगढ़ के रायपुर से जय विजय एवं उनकी माताजी व नर्मदा जी के तट पर 250 गौमाताओं की सेवा करने वाली श्रीमती सुधा जी बाहेती नेमावर आदिअतिथि के रूप में उपस्थित रहें । आगामी 09 मार्च को धेनु धरती फाउंडेशन के तत्वाधान में होगी ऋषि कृषि संगोष्ठी ।

⏩ 329 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 329 वें दिवस पर चुनरी यात्रा हाड़ौती नोबेल समाचार पत्र के संवाददाता धीरज गुप्ता एवं उनके पिता श्री कन्हैया लाल गुप्ता सुनेल (झालावाड़) के परिवार , डग तहसील के रतनपुरा एवं पचपहाड़ तहसील के गुराडिया की महिला मंडल एवं  राजगढ़ जिले की सारंगपुर तहसील के गामड़ी ग्राम की ओर से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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