“सशक्त मातृशक्ति: ऐसा चरित्र गढ़ें कि कोई आँख उठाने की हिम्मत न करे!”जानिए, साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती ने और क्या प्रेरणा दी मातृशक्ति को?
क्या आप जानते हैं? विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में संत कमल किशोर नागर क्यों देने जा रहे हैं आशीर्वचन?
सुसनेर। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के अंतर्गत जनपद पंचायत सुसनेर के समीप स्थित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य, मालवा में वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव का आयोजन चल रहा है। इस एक वर्षीय अनुष्ठान के 334वें दिवस पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने वीर बलिदानी पन्नाधाय के बलिदान को नमन करते हुए मातृशक्ति को राष्ट्र और संस्कृति रक्षा का संदेश दिया।
स्वामी गोपालानंद सरस्वती का संदेश
स्वामीजी ने कहा, “आज का दिन बलिदान और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है। पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर मेवाड़ के राजकुमार उदयसिंह को बचाया। यह साहस और समर्पण केवल सात्विकता और गोसेवा से आता है। गाय माता की निस्वार्थ सेवा से व्यक्ति में वह शक्ति आती है कि वह असंभव को भी संभव कर सकता है।”
उन्होंने समाज को संदेश दिया कि “आज राष्ट्र, सनातन धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए हमें अपनी संतानों को प्रेरित करना होगा। पेट तो जानवर भी भर लेते हैं, लेकिन मनुष्य का धर्म है कि वह राष्ट्र और समाज के लिए कुछ करे।”

9 मार्च को क्यों महत्वपूर्ण है गो अभयारण्य?
स्वामीजी ने जानकारी देते हुए बताया कि 9 मार्च, रविवार को मालवा माटी के संत एवं गौसेवक परम पूज्य कमल किशोर नागर जी गो अभयारण्य में आशीर्वचन देने पधार रहे हैं।
इसके साथ ही महाशिवरात्रि पर्व पर राधाकृष्ण युगल सरकार का विवाह हुआ था, वे भी पहली बार फगफेरे के लिए गो अभयारण्य आएंगे। यह एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण होगा, जिसमें भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा।
मातृशक्ति के लिए विशेष संदेश
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दवादेवी फाउंडेशन की प्रमुख साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती ने मातृशक्ति को प्रेरित करते हुए कहा:
“मातृशक्ति अपने चरित्र को इतना मजबूत बनाए कि कोई आंख उठाकर न देख सके।”
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गार्गी, मैत्रेयी, माता अहिल्याबाई होल्कर, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, भीकाजी कामा, और नीरा आर्या जैसी वीरांगनाओं की गौरवमयी गाथाएं रही हैं।
साध्वी जी ने कहा, “मां अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल गोसेवा की, बल्कि भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का पुनर्निर्माण कर हमारी सनातन संस्कृति की रक्षा की। यह सब उन्होंने अपने श्रेष्ठ चरित्र और संकल्प शक्ति के बल पर किया।”
उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि “हमारे विचार और कर्म इतने पवित्र हों कि जैसे रावण लंका में रहकर भी माता सीता की छाया को छूने में असमर्थ था, वैसे ही कोई भी विधर्मी ताकत हमें छू न सके।”
2 से 10 अप्रैल तक आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर
साध्वी कपिला गोपाल सरस्वती ने बताया कि 2 से 10 अप्रैल तक विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में मातृशक्ति आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं से इस शिविर में भाग लेकर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना बनने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

334वें दिवस पर चुनरी यात्रा और गोसेवा
महामहोत्सव के 334वें दिवस पर राजस्थान के कोटा जिले (रामगंजमंडी) से श्रद्धालु भगवती गोमाता के लिए चुनरी यात्रा लेकर गो अभयारण्य पहुंचे।
इस यात्रा में शामिल रत्ना जी राठौड़, मनीषा जी राठौड़, सुमन जी राठौड़, सीतु राठौड़, हंसा राठौड़, निर्मला जी राठौड़, कल्ला जी राठौड़, निया जी राठौड़, गिरिराज जी राठौड़, हरिप्रसाद जी राठौड़, लोकेश जी राठौड़, राहुल जी राठौड़ और विनोद जी राठौड़ ने पूरे भक्तिभाव से भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई और पूजन किया।
इसके बाद स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया और यज्ञशाला की परिक्रमा करते हुए गो सेवा में भाग लिया। अंत में सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
संतों का आशीर्वाद और विशेष जन्मदिन पूजन
सूरत से सत्यनारायण जी चांडक की पुत्री प्राणवी, धेनु शक्ति संघ सुसनेर की वर्षा राठौर, और रामगंजमंडी के उद्धव के जन्मदिवस पर पूज्य महाराज जी ने आशीर्वाद दिया। उन्होंने संदेश दिया कि “आप सभी गोमाता की सेवा करते हुए अपने जीवन को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करें।”
विश्व का प्रथम गो अभयारण्य केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और गोसेवा का एक जीवंत केंद्र बन चुका है। यहां हर दिन कोई न कोई विशेष आयोजन होता है, जिससे सनातन धर्म के प्रति आस्था और निष्ठा बढ़ती है।
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