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“कुंडालिया डैम घोटाला: अफसरों की आंखों में धूल झोंककर नहीं, उनकी मिलीभगत से हुआ 5.85 करोड़ का खेल!” जानिए: कैसे बना ‘बच्चों’ को वयस्क बनाने का मास्टर प्लान?

“कुंडालिया डैम घोटाला: प्रशासन की नजरअंदाजी या सुनियोजित साजिश?”

जनमत जागरण@ उज्जैन । कुंडालिया डैम विस्थापन योजना में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें ₹5.85 करोड़ की हेराफेरी कर 107 लोगों को अवैध रूप से लाभ दिलाने का मामला उजागर हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को कागजों में वयस्क दिखाकर उन्हें पुनर्वास भत्ता बांटा गया। इस गड़बड़ी को रोकने की जिम्मेदारी जिन सरकारी अफसरों पर थी, वे या तो लापरवाह निकले या फिर इस खेल के ‘हिस्सेदार’। अब लोकायुक्त ने 9 सरकारी अधिकारियों समेत कुल 107 लोगों पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

▪️फर्जी दस्तावेजों से हुआ करोड़ों का खेल!

प्रेस नोट के अनुसार, ग्राम भंडावद में विस्थापन के दौरान 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आधार कार्ड, मार्कशीट और अन्य पहचान पत्रों में छेड़छाड़ कर उन्हें वयस्क दर्शाया गया। इसके आधार पर उन्हें प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपए का विशेष पुनर्वास भत्ता दिलाया गया। इस दस्तावेज़ी धांधली को वैध ठहराने के लिए महिला एवं बाल विकास अधिकारी, शिक्षा विभाग, राजस्व निरीक्षक, पंचायत सचिव और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संयुक्त कमेटी बनाई गई थी, लेकिन इस कमेटी ने फर्जीवाड़े को पकड़ने की जहमत ही नहीं उठाई।

▪️बड़ा सवाल: लापरवाही या मिलीभगत?

अब सवाल यह उठता है कि क्या इन सरकारी अधिकारियों से इतनी बड़ी गड़बड़ी अनजाने में हो गई, या फिर यह एक सुनियोजित साजिश थी? क्या बिचौलियों और अफसरों के बीच पहले से ही कोई ‘समझौता’ हो चुका था, जिससे किसी ने दस्तावेजों की असलियत जांचने की जरूरत ही नहीं समझी? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी या घोटाले का हिस्सा?

लोकायुक्त उज्जैन द्वारा जारी प्रेस नोट

जानिए, क्या कहा पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन अनिल कुमार विश्वकर्मा ने?

लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने कुंडलिया डैम घोटाले में जांच तेज कर दी है। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन अनिल कुमार विश्वकर्मा ने जनमत जागरण को बताया कि प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार के गंभीर संकेत मिले हैं। इस संबंध में लोकायुक्त कार्यालय द्वारा प्रेस नोट जारी किया गया है

सूत्रों के अनुसार, परियोजना में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें सरकारी धन के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं। लोकायुक्त की टीम मामले की गहन जांच कर रही है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

▪️घोटाले की संख्याओं में पूरी कहानी:

📌 ₹5.85 करोड़ का सरकारी नुकसान
📌 107 लोगों पर केस दर्ज
📌 9 सरकारी अधिकारी जांच के घेरे में
📌 फर्जी लाभार्थियों को 5 लाख प्रति व्यक्ति भुगतान
📌 दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर नाबालिगों को वयस्क बनाया गया

▪️जांच का दायरा कितना गहरा जाएगा?

लोकायुक्त ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों पर गाज गिरेगी, या फिर घोटाले के असली सूत्रधारों तक भी जांच पहुंचेगी? सरकार विस्थापितों के लिए योजनाएं बनाती है, लेकिन जब इन्हें लागू करने वाले अफसर ही भ्रष्टाचार में लिप्त हों, तो जनता किससे न्याय की उम्मीद करे?

(इस मामले की गहराई से पड़ताल जारी रहेगी—क्या यह घोटाला सिर्फ एक गांव तक सीमित है, या इसके तार कहीं और भी जुड़े हैं? पढ़ते रहिए जनमत जागरण!)


जनमत जागरण इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाएगा। जुड़े रहिए!

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