क्या दोहरे चेहरे वालों से कमजोर हो रहा सनातन?” क्या गौसेवा विरोधी अपना ही विनाश लिख रहे हैं?” – संत कमल किशोर नागर ने बताई सनातन की मजबूती और गोसेवा की महत्ता

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत, जनपद पंचायत सुसनेर के समीप स्थित श्री कामधेनु गो अभयारण्य, मालवा में चल रहे एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 335वें दिवस पर संत कमल किशोर नागर ने समाज में फैले दोहरे चरित्र पर कड़ा प्रहार किया।
👉 स्वामी गोपालानंद सरस्वती का आह्वान – “गौसेवा से ही आत्मोद्धार संभव!”
गो अभयारण्य में चल रहे वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के दौरान स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने गौसेवा को मानव जीवन की सबसे बड़ी साधना बताया। उन्होंने कहा कि “गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि साक्षात धर्म की प्रतीक हैं। जो व्यक्ति गौसेवा करता है, वह जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करता है।” उन्होंने गौसेवा विरोधियों को चेताते हुए कहा कि “जो समाज गौमाता का सम्मान नहीं करता, वह शीघ्र ही अपने अस्तित्व को खो देता है।

राम और रावण का मुखौटा पहनकर मत बनो ढोंगी!
संत नागर ने कहा कि आज कुछ लोग राम और रावण दोनों का मुखौटा पहनकर कार्य कर रहे हैं। एक तरफ वे धर्म और गौसेवा की बात करते हैं, दूसरी तरफ उसका विरोध भी करते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो राम को मानते हैं, वे रावण का किरदार निभाना छोड़ दें। उन्होंने राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे अपनी कथनी और करनी में भेद न रखें।
पांच महापाप से बचें, गौसेवा अपनाएं!
संत नागर ने बालहत्या, परस्त्रीगमन, विश्वासघात, स्वर्ण की चोरी और आग लगाने को महापाप बताया और कहा कि जो लोग गौसेवा का विरोध कर रहे हैं, वे कहीं न कहीं इन पापों में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि “आज सनातन कमजोर हो रहा है और विधर्मी मजबूत हो रहे हैं, क्योंकि किसान रासायनिक खेती कर जीवों को मार रहा है।” इस विकृति को रोकने के लिए उन्होंने धेनु धरती फाउंडेशन के गठन की घोषणा की, जिसके तहत किसानों को गौ आधारित जैविक कृषि के लिए जागरूक किया जाएगा।
मोबाइल ने बिगाड़ी युवा पीढ़ी, माता-पिता को बना दिया अजनबी?
नागर जी ने मोबाइल की लत को युवाओं के पतन का कारण बताते हुए कहा कि आज की संतान अपने माता-पिता को भी अपशब्द कहने लगी है। उन्होंने कहा कि “कुत्ता भी एक रोटी खाने के बाद अपने मालिक पर नहीं भौंकता, लेकिन आज की पीढ़ी माता-पिता का सम्मान तक नहीं कर रही।” इसके समाधान के रूप में उन्होंने युवाओं को गौसेवा में लगाने की सलाह दी।
बेटी सुधरेगी तो बहू भी अच्छी बनेगी!
संत नागर ने समाज में व्याप्त पारिवारिक समस्याओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि “लोग अपनी बहू को सुधारने की बात करते हैं, लेकिन असल में बेटियों को संस्कार देने की जरूरत है। अगर बेटी अच्छे संस्कारों में पलेगी, तो वह एक अच्छी बहू भी बनेगी।”
क्या गौसेवा विरोधी ही सनातन के सबसे बड़े शत्रु?
संत नागर जी के प्रवचन ने गौसेवा के महत्व को एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने समाज को चेताया कि जो गौसेवा का विरोध कर रहे हैं, वे ही सनातन संस्कृति के सबसे बड़े शत्रु हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या दोहरे चेहरे वाले लोग ही सनातन को कमजोर कर रहे हैं?
👉 किसान को ऋषि कृषि की ओर बढ़ना होगा
धेनु धरती फाउंडेशन के प्रमुख अजीत शर्मा ने जहरीली एवं विषयुक्त खेती से आज किसान को ऋषि कृषि की ओर बढ़ना होगा इसलिए अब हर किसान को भगवती गोमाता की सेवा के लिए जुटना होगा ।
“आज की कथा – गौसेवा से जुड़ने का संकल्प!
335वें दिवस की कथा में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से गौमाता के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। कथा के दौरान बताया गया कि प्राचीन ऋषि-मुनियों ने अपनी तपस्या और यज्ञीय कर्मों में गौमाता को केंद्र में रखा था, जिससे प्रकृति और मानव जीवन में संतुलन बना रहता था। आज की कथा में यह भी बताया गया कि जो किसान जैविक खेती अपनाकर गौमाता के गोबर और गोमूत्र का उपयोग कर रहे हैं, वे न केवल अपने खेतों को उर्वर बना रहे हैं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध हो रहे हैं। कथा के अंत में उपस्थित भक्तों ने गौसंवर्धन और सनातन धर्म की रक्षा हेतु अपने योगदान का संकल्प लिया।

राजस्थान-मध्यप्रदेश से चुनरी यात्रा, गौमाता को अर्पित की श्रद्धा
335वें दिवस पर राजस्थान के पचपहाड़ और मध्यप्रदेश के सालरिया से गौभक्तों ने चुनरी यात्रा निकालकर भगवती गौमाता को चुनरी ओढ़ाई। स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लेकर भक्तों ने गौ पूजन, यज्ञशाला की परिक्रमा और गोसेवा का संकल्प लिया।



