“क्या गौसेवा से कॉर्पोरेट यात्रा तक, मुख्यमंत्री मोहन यादव रच रहे हैं नई नीति? स्वामी जी बोले – यह नई दिशा रामराज्य की ओर संकेत!”

क्या मध्यप्रदेश में गौसेवा से रामराज्य की स्थापना के संकेत?
जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अपना जन्मदिवस गौसेवा के साथ मनाने का संकल्प लिया है। 25 मार्च 2025, मंगलवार को पापमोचनी एकादशी के पावन अवसर पर वे सालरिया (आगर मालवा) स्थित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य में सवा छः हजार गौमाताओं को लड्डू प्रसाद अर्पित कर अपनी आस्था प्रकट करेंगे। स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने इस निर्णय को प्रदेश के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि जब प्रदेश का मुखिया गौसेवा को प्राथमिकता देता है, तो यह रामराज्य की ओर संकेत करता है।
“क्या गौसेवा से कॉर्पोरेट यात्रा तक, मुख्यमंत्री मोहन यादव रच रहे हैं नई नीति?”
स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के जन्मदिवस को गौसेवा और गवर्नेंस के संतुलन का प्रतीक बताते हुए इसे रचनात्मक यात्रा कहा। उन्होंने कहा कि जब कोई प्रदेश का मुखिया गौसंरक्षण और शासन व्यवस्था को साथ लेकर चलता है, तो यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक नीति का संकेत होता है।
स्वामी जी ने मुख्यमंत्री की इस पहल को “नई दिशा” देते हुए कहा—
“जब नेतृत्व गौसेवा को आत्मसात करता है, तो शासन में करुणा, संवेदनशीलता और संतुलन आता है। गौसंरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और आर्थिक समृद्धि से भी जुड़ा है। जिस प्रदेश का नेतृत्व इस गहराई को समझता है, वह शासन को एक नई ऊंचाई पर ले जाता है।”
क्या यह पहल गौसंरक्षण, सामाजिक सद्भाव और आर्थिक नीति को जोड़ते हुए मध्यप्रदेश को एक नई पहचान देने वाली है? क्या मुख्यमंत्री की यह यात्रा गवर्नेंस और आध्यात्मिक सोच का एक नया मॉडल बनेगी?
गौशालाओं को मिलेगी दोगुनी सहायता
मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में प्रदेश की सभी गौशालाओं के गोवंश के चारे के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रति गोवंश किए जाने का निर्णय लिया गया था। अब शासन ने इसे 1 अप्रैल 2025 से लागू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह निर्णय गौशाला संचालकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
गौसंरक्षण के लिए गठित संगठन सक्रिय
गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए गोपाल परिवार संघ द्वारा 12 फाउंडेशन गठित किए गए हैं, जिनमें से “धेनु शक्ति संघ” प्रमुख रूप से कार्यरत है। संघ की बहिन करुणा गोपाल ने बताया कि इन संगठनों का उद्देश्य गोमाता को आश्रय, आहार, औषधि, आज़ादी, आनंद और आलिंगन दिलाना है। इसके अलावा, ग्वाल शक्ति सेना एवं धेनु शक्ति संघ मिलकर गौमाता को तस्करों, कष्ट और पीड़ा से बचाने के लिए अभियान चला रहे हैं।
गौसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान
गौसेविका कृष्णा टांक (बाड़ी माता) ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब तक गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान नहीं मिलता, तब तक हर व्यक्ति को गौसेवा में समर्पित रहना होगा। उन्होंने सभी मातृशक्ति और पुरुष वर्ग से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में गौसेवा से जुड़ें, ताकि भारत में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सके।

चुनरी यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
342वें दिवस पर दिल्ली, राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु चुनरी यात्रा लेकर पहुंचे। इस अवसर पर अरुण वाटल, श्रीमती रजनी वाटल (दिल्ली), रमेशचंद प्रधान (डग, झालावाड़), ब्रजमोहन गुप्ता (देहरिया), राधेश्याम गुप्ता (डोंगरगांव सोयत), गडबड़ा (आगर) के गोभक्त सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भगवती गोमाता को चुनरी अर्पित की, पूजन किया और यज्ञशाला की परिक्रमा करके गोसेवा में भाग लिया।
क्या गौसेवा के बढ़ते कदम मध्यप्रदेश को नई पहचान देंगे?
मुख्यमंत्री का यह निर्णय प्रदेश के लिए एक नई दिशा स्थापित कर सकता है। गौसेवा को सरकार की प्राथमिकता में लाकर क्या मध्यप्रदेश में एक नई धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनेगी? क्या गौसंरक्षण की यह पहल देशभर में एक मिसाल बनेगी? ये सवाल प्रदेश की जनता के लिए विचारणीय हैं।



