सुसनेर नगर परिषद: राजनीति का महाभारत – “कौन किसका सगा?” 👉 सुसनेर की सियासत में मचा बवाल, BJP-कांग्रेस पार्षदों की चाल, दिनभर का जानिए पूरा हाल!

BJP पार्षदों की चालें उलझी, कांग्रेस के खेल जारी – निर्दलीय पार्षद बना “मौसम वैज्ञानिक!”
👉”रामनवमी मेला” से “नगर बंद” तक, सुसनेर की राजनीति में किसका गेम प्लान भारी?
जनमत जागरण @ सुसनेर। नगर परिषद में इन दिनों राजनीति कुछ ऐसी चल रही है, जैसे शादी में खाना परोसते समय चम्मच गिर जाए और सब लोग उसी को उठाने में लग जाएं—मूल मुद्दा गायब, बस उठापटक चालू! जनता ने सोचा था कि पार्षद विकास की गंगा बहाएंगे, लेकिन यहां तो “गुटबाजी की बाढ़” आ गई है। कांग्रेस के पार्षद तो अपनी पार्टी के प्रति वफादार हैं, लेकिन भाजपा के कुछ पार्षद कभी अपने दल के साथ होते हैं, कभी कांग्रेस की गोदी में बैठ जाते हैं। ऊपर से एक निर्दलीय पार्षद भी है, जो मौसम वैज्ञानिकों से ज्यादा हवा का रुख भांपने में माहिर निकला!
“भ्रष्टाचार हटाएंगे!” (बस, तारीख बाद में देंगे)
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई यहां किसी मेले के झूले की तरह है—थोड़ी देर जोर से घूमता है, फिर वहीं आकर रुक जाता है! जब कोई पार्षद नगर परिषद में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाता है, तो जनता ताली बजाने लगती है। लेकिन कुछ दिनों बाद वही पार्षद, अध्यक्ष की कुर्सी के आसपास घुमते नजर आते हैं, और फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा “गायब!” जनता को अब शक होने लगा है कि ये पार्षद भ्रष्टाचार मिटाने की बात कर रहे हैं, या अपनी जेबें भरने का कोई नया आईडिया निकाल रहे हैं?

रामनवमी मेला: “वाट्सएप सरकार” बनाम “असल परिषद”
अब नगर में एक और कमाल हो गया! रामनवमी मेला आयोजित होने की आधिकारिक घोषणा परिषद की बैठक में होनी थी, लेकिन इससे पहले ही कुछ पार्षद प्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी—”नगर परिषद इस साल भव्य रामनवमी मेला आयोजित करेगी!” जनता भी पोस्ट देखकर अचरज में पड़ गयी। लेकिन जब असल बैठक हुई, तो सीएमओ ओ.पी. नागर खुद चौंक गए! बोले—“अभी तो पार्षदों ने सिर्फ आवेदन दिया है, इस पर फैसला तो अभी बाकी है। लगता है अब फैसले परिषद में कम और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में ज्यादा लिए जाने लगे हैं!”
अब जनता सोच में पड़ गई—“अरे भाई, अब फैसला नगर परिषद लेगी या फेसबुक पोस्ट लिखने वाले पार्षद?”
बीजेपी के पार्षद: “पार्टी हमारी, पर दोस्ती सबकी!”
कांग्रेस के चार पार्षद तो पार्टी लाइन पर टिके हुए हैं, लेकिन भाजपा के कुछ पार्षदों की चाल देख जनता भी दंग है! कभी वे अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं, तो कभी कांग्रेस के साथ मिलकर बैठकी जमाते हैं। मतलब, राजनीति अब सीधी नहीं, बल्कि “Zig-Zag मोड” में चल रही है!
निर्दलीय पार्षद: “किधर जाएं? जिधर मन मिले!”
अब निर्दलीय पार्षद का हाल तो ऐसा है, जैसे कोई व्यक्ति स्टेडियम में बैठकर दोनों टीमों का समर्थन कर रहा हो और अंत में ट्रॉफी उठाने की कोशिश कर रहा हो! कभी इधर झांकते हैं, कभी उधर ताकते हैं, और कभी खुद को “नगर का संत” बताने लगते हैं। मतलब, पूरा नगर परिषद एक “पॉलिटिकल एंटरटेनमेंट शो” बन चुका है!
“मांग पत्र या बहानेबाजी का दस्तावेज?”

गुरुवार को कांग्रेस के पार्षदों ने नगर परिषद के बाहर कुछ देर के लिए धरना प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और फिर एक “अत्यंत गंभीर” मांग पत्र सीएमओ को थमा दिया। माहौल ऐसा था मानो नगर की सारी समस्याएं बस इसी ज्ञापन के इंतजार में थीं!
अब दिलचस्प बात यह है कि पहले चर्चा रामनवमी मेले की हो रही थी, फिर अचानक मुद्दा नगर विकास की ओर घूम गया! पार्षदों ने ऐलान कर दिया कि “अगर हमारी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो 1 अप्रैल के बाद नगर बंद और चक्का जाम करेंगे!” अब जनता सोच में पड़ गई—“ये मुद्दा मूलभूत सुविधाओं का है या राजनीतिक दांव-पेच का?”
सबसे मजेदार बात तो यह रही कि मांग पत्र को पढ़ने के बाद खुद कांग्रेसी कार्यकर्ता भी कन्फ्यूज हो गए कि “आखिर हम मांग क्या रहे हैं?” क्योंकि उसमें मुद्दे कम और इरादे ज्यादा झलक रहे थे! कुल मिलाकर, यह ज्ञापन नगर विकास की बजाय “राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने का टूल” ज्यादा लग रहा था।
अब सवाल यह है कि 1 अप्रैल के बाद वाकई नगर बंद होगा, या यह बयान भी “अप्रैल फूल” साबित होगा? जनता इंतजार कर रही है!
जनता कह रही—”अब बहुत हुआ, नेताजी!”
सड़कों के गड्ढे गहरे हो रहे हैं, पानी की समस्या विकराल हो रही है, लेकिन पार्षदों की राजनीति सिर्फ “कौन किसका दोस्त और दुश्मन?” पर ही अटकी हुई है। जनता अब समझ चुकी है कि इनके वादे सिर्फ चुनाव तक टिकते हैं, और फिर अगले चुनाव तक जनता को भूल जाते हैं।
लेकिन नेताजी, इस बार जनता भी पूरी तैयारी में है! अगर यही हाल रहा, तो 2028 में जनता का “राजनीतिक झाड़ू” ऐसा चलेगा कि कई नेताओं की सीटें हमेशा के लिए सफाचट हो जाएंगी!

👉 नेताजी, सोशल मीडिया पर घोषणाएं करने से जनता खुश नहीं होगी, अब काम करके दिखाना पड़ेगा! वरना अगली पोस्ट कुछ और ही होगी…



