अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

“मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गौमाताओं के बीच मनाया जन्मदिवस, अब शंकराचार्य देंगे विशेष आशीर्वाद – जानिए, क्या है आध्यात्मिक संदेश?”

सुसनेर @ जनमत जागरण। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने 61वें जन्मदिवस को अद्वितीय रूप में मनाते हुए 6700 गोमाताओं के बीच गोसेवा और गोपूजन कर भारतीय परंपरा की मिसाल पेश की। यह आयोजन विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य (मालवा) में आयोजित किया गया, जहां स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने उपस्थित जनसमूह को निष्काम सेवा और गोसेवा का महत्व बताया।

स्वामीजी ने बताया – कामना रहित कार्य ही सच्ची सेवा!

गो आराधना महामहोत्सव के 352वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कहा,
“सच्ची भक्ति वही है जो निष्काम भाव से की जाए। गोसेवा करने से गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने में सफलता मिल सकती है। गोमाता के कीर्तन से भय और बाधाओं का समाधान होता है, इसलिए जन्मदिवस पर कीर्तन करना चाहिए।”

सीएम ने गोमाताओं के बीच मनाया जन्मदिवस, पंचतारा होटलों से अलग मिसाल!

स्वामीजी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जन्मदिवस के आयोजन पर कहा –
“जब अन्य बड़े लोग पंचतारा होटलों में जन्मदिन मनाने में व्यस्त रहते हैं, तब मुख्यमंत्री ने गोमाताओं के बीच गो पूजन, यज्ञ एवं आंवला वृक्षारोपण कर प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

जानिए, क्यों खास होता है जन्मदिवस पर तुलादान?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने वजन का तुलादान कर अध्यात्म में ऊंचाइयों को छूने का संदेश दिया। स्वामीजी ने बताया,
“जब तुलादान में व्यक्ति का पलड़ा ऊपर उठता है, तो अध्यात्म जगत में भी उसकी स्थिति ऊंची होती है।

27 मार्च को कौन से जगद्गुरु करेंगे गो अभयारण्य में प्रवेश?

27 मार्च को जगद्गुरू शंकराचार्य भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ का पावन सानिध्य प्राप्त होगा। वहीं 29, 30 और 31 मार्च को पूज्य राधाकृष्ण जी महाराज के श्रीमुख से संगीतमय मायरा कथा का आयोजन होगा।

352वें दिवस पर चुनरी यात्रा में कौन-कौन हुए शामिल?

इस अवसर पर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश से श्रद्धालुओं ने चुनरी यात्रा निकाली। दिल्ली के करनाल, राजस्थान के मेवाड़, नाथद्वारा, अजमेर, झालावाड़, मध्यप्रदेश के आगर और सुसनेर से आए भक्तों ने भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाकर पूजन किया

स्वामीजी ने किया खुलासा – क्यों कहा जाता है कि जन्मदिवस पर वृक्षारोपण से मिलता है गौशाला बनाने का पुण्य?

स्वामीजी ने बताया कि जन्मदिवस पर लगाए गए वृक्ष के नीचे यदि गोमाता विश्राम करे, तो उसका फल गौशाला निर्माण के बराबर होता है। मुख्यमंत्री ने 108 आंवला वृक्षारोपण कर इस परंपरा को सशक्त किया।

समाप्ति में हुआ भव्य गो पूजन और महाप्रसाद वितरण!

अंत में सभी भक्तों ने गोमाता की पूजा, यज्ञशाला की परिक्रमा और गोष्ठ में गोसेवा कर गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

👉 यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि गोसंरक्षण और भारतीय परंपराओं के प्रति जागरूकता का संदेश था।

Related Articles

error: Content is protected !!