अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

गोकृपा वेद-लक्षणा कथा का समापन: साधुओं ने बताया गौमाता ही है कलियुग का चलता-फिरता मंदिर

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य, मालवा में चल रहे एक वर्षीय वेद-लक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव के दसवें दिवस पर विविध संतों और गोसेवकों ने अपने विचार रखे।

स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने इस अवसर पर ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और देशभक्त मंगल पांडे को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “मंगल पांडे ने राष्ट्रधर्म और गोमाता की रक्षा हेतु फांसी को हार की तरह पहना। वे गोसेवकों के लिए भगवान स्वरूप हैं।”

स्वामीजी ने कहा, “जिसने गाय माता की शरण ली, वह अमर हो गया। यदि गोमाता से प्रेम है तो राष्ट्र अवश्य बचेगा। गोशाला अंतिम विकल्प है, पहले गोपाल बनकर गाय को घर, आश्रम, गुरुकुल और मंदिर में रखना चाहिए।”

महामंडलेश्वर जानकीदास जी महाराज, गुजरात ने अपने उद्बोधन में कहा, “कलियुग में गोमाता ही साक्षात चलता फिरता मंदिर हैं। उनके वंश नन्दी बाबा धर्म के प्रतीक हैं। गोसेवा से प्राप्त पुण्य ही वास्तविक स्वर्ग का धन है।” उन्होंने यह भी कहा कि “गो आधारित कृषि ही सात्विक जीवन का श्रेष्ठ साधन है, अतः देश के अन्नदाताओं को इसी पथ पर लौटना होगा।”

अखिल भारतीय निर्मोही अखाड़ा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पूज्य राधे बाबा निर्मोही ने कहा, “इस अभयारण्य की हवा में ही वेदोक्त शीतलता है। यह गोमाता की प्रसन्नता का प्रमाण है। स्वामी गोपालानंद जी महाराज साधु रूप में भगवान के प्रतिनिधि हैं, जो गोमाता के संरक्षण और सम्मान हेतु समर्पित हैं।”

राधे बाबा ने यह भी कहा कि “निर्मोही अखाड़ा सदैव गो रक्षार्थ स्वामीजी के साथ खड़ा रहेगा।”

स्वामीजी ने जानकारी दी कि 9 से 11 अप्रैल 2025 तक गो अभयारण्य में त्रिदिवसीय गो आधारित कृषि प्रशिक्षण शिविर आयोजित होगा। इसमें बंशी गिर गोशाला के संस्थापक गोपाल भाई सुतारिया, डॉ. पवन टांक (गोयल ग्रामीण विकास संस्थान), कृष्ण मुरारी जी (भारतीय किसान संघ) सहित अन्य विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।

इस अवसर पर इंदौर, पिपलिया नानकार, सुसनेर और आसपास के क्षेत्रों से गोसेवकों ने गाजे-बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी यात्रा में भाग लिया। चुनरी अर्पण कर गो पूजन किया गया और यज्ञशाला की परिक्रमा के पश्चात गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण कर समर्पण भाव प्रकट किया।


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