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गोमाता की महिमा से देश हुआ अभिभूत: वेदलक्षणा गो आराधना कथा का चतुर्दश दिवस बना दिव्य अनुभूति

गोमाता की महिमा से देश हुआ अभिभूत – वेदलक्षणा गो आराधना कथा के उपसंहार उत्सव का चतुर्दश दिवस बना अविस्मरणीय
गाय और धरती माता के बिना भारत की कल्पना अधूरी – गोपाल भाई सुतारिया

सुसनेर (जनमत जागरण)। विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य, मालवा में गत एक वर्ष से चल रही वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव कथा अपने समापन की ओर बढ़ रही है, जहां उपसंहार उत्सव के चतुर्दश दिवस पर भक्ति, श्रद्धा और गोप्रेम की अनुपम धारा प्रवाहित हुई। स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने इस अवसर पर भावविभोर करते हुए कहा – “गाय माता है तो जीवन में आनंद है, वरना केवल दुःख, उदासी और संकट है। यह वैज्ञानिक भी स्वीकार कर चुके हैं कि गोमाता विष को क्षणों में हर सकती हैं। जो एक गाय को अपना लेता है, उसे गोविंद की प्राप्ति भी निश्चित है।”

श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के युवा संत पूज्य मुकुंद प्रकाश जी महाराज ने इस आयोजन को देशभर में गोमाता की महिमा के प्रचार की क्रांति बताते हुए कहा – “सनातन धर्म की आत्मा गोमाता हैं। जब तक भारत माता में गोमाता प्रसन्न नहीं, तब तक कोई भी धार्मिक आयोजन अधूरा है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि कथा में चाहे कितना भी नृत्य और गीत हों, यदि उसमें गोमाता न हों तो सब व्यर्थ है।

मिथिला के सीतामढ़ी से पधारे पूज्य किशोरी जी महाराज ने आहार की शुद्धि को मानव जीवन की पहली साधना बताया और कहा – “गव्य पदार्थ ही मानव के लिए सर्वोत्तम हैं। वाणी पर संयम और हर श्वास को प्रभु की भक्ति में लगाना ही जीवन की दिशा है।”

कर्णावती (अहमदाबाद) की बंशीगिर गोशाला के गोपाल भाई सुतारिया ने ‘ऋषि कृषि आधारित जैविक प्रशिक्षण’ में मार्गदर्शन देते हुए कहा – “गाय माता और धरती माता दुखी होंगी, तो देश सुखी नहीं रह सकता। भारतीय देशी गाय का दूध संपूर्ण पोषण का सबसे बड़ा स्रोत है। मक्खन बच्चों के लिए सर्वोत्तम टॉनिक है और शिव पूजन में चढ़ने वाला दूध भी केवल गाय का ही होना चाहिए।”

इस पुण्य अवसर पर पिड़ावा, कचनारा, बागड़वासी, अमलनेर, उदयपुर एवं सुसनेर के गोभक्त मंडलों ने 56 भोग, गाजे-बाजे और भगवती गोमाता के पूजन के साथ चुनरी अर्पित की। सभी गोभक्तों ने स्वामी गोपालानंद जी से आशीर्वाद प्राप्त कर यज्ञशाला की परिक्रमा की, गोशाला में सेवा कर गोव्रती महाप्रसाद का लाभ लिया।

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