“माली समाज ने नगर में भव्य चल समारोह के साथ मनाई महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती, बालिकाओं ने दिखाए अखाड़े के करतब”

नगर में निकला चल समारोह, बालिकाओं ने दिखाए आकर्षक शौर्य प्रदर्शन | जगह-जगह हुआ स्वागत
जनमत जागरण @सोयतकलां
सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत, शिक्षाविद् व क्रांतिकारी विचारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जन्म जयंती के अवसर पर नगर का वातावरण सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक गरिमा से सराबोर हो उठा।
11 अप्रैल को फूलमाली समाज के तत्वावधान में निकले भव्य चल समारोह ने नगरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। समारोह में समाजबंधुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी, बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत अखाड़े के शौर्यपूर्ण करतब, एवं महात्मा फुले-सावित्रीबाई फुले के प्रेरणास्पद चित्रों की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
चल समारोह नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए श्रद्धा व सम्मान के साथ माली धर्मशाला पहुँचा, जहाँ दीप प्रज्वलन के साथ समारोह की विधिवत शुरुआत हुई। समाज की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप, राष्ट्रीय फुले ब्रिगेड के प्रदेश उपाध्यक्ष आदरणीय अर्जुनजी माली (सरवानिया-नीमच) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में महात्मा फुले के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने समाज की माताओं-बहनों को शिक्षा, संगठन व आत्मबल की दिशा में जागरूक करते हुए फुले दंपत्ति के जीवन संदेश को वर्तमान संदर्भों में प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर अखाड़ा प्रमुख शुभम जी ने बालिकाओं को शस्त्र विद्या, आत्मरक्षा तथा भारतीय परंपरागत युद्ध कलाओं की ओर आकर्षित करते हुए, आत्मबल और आत्मविश्वास को समाज निर्माण का मूल मंत्र बताया।
कार्यक्रम के समापन पर समाज के अध्यक्ष कमलजी बड़ोदिया ने समस्त आगंतुकों, सहभागीजन एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।
✍️ सम्पादकीय टिप्पणी :
महात्मा ज्योतिबा फुले केवल एक समाज सुधारक नहीं थे, वे भारत की आत्मा में समता, शिक्षा और न्याय का बीज बोने वाले सच्चे युगद्रष्टा थे। माली समाज द्वारा उन्हें इस गरिमामय श्रद्धांजलि स्वरूप याद करना, वास्तव में भारतीय सामाजिक चेतना के उन्नयन की ओर एक सार्थक पहल है।



