मंदसौरमध्यप्रदेशसंघ शाताब्दी वर्षस्पेशल रिपोर्ट

परिवार, पर्यावरण और राष्ट्र चेतना का संगम बना मातृहस्त भोजन कार्यक्रम , संघ शिक्षा वर्ग में भारतीय संस्कृति की आत्मा हुई अभिव्यक्त

बदलते समय की तेज़ रफ्तार में जब परिवारों के आंगन से संवाद कम होता जा रहा है, संस्कारों की जगह स्क्रीन का उजाला बढ़ रहा है और समाज आत्मीयता की तलाश में भटकता दिखाई देता है, ऐसे दौर में मंदसौर की धरती पर एक ऐसा दृश्य साकार हुआ जिसने भारतीय संस्कृति की आत्मा को पुनः जीवंत कर दिया। माताओं के हाथों से बने भोजन की सुगंध, स्वयंसेवकों की अनुशासित कदमताल, पर्यावरण संरक्षण का संकल्प और राष्ट्र निर्माण का संदेश—इन सबने मिलकर संघ शिक्षा वर्ग को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों के उत्सव में परिवर्तित कर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) मंदसौर में शनिवार को आयोजित मातृहस्त भोजन कार्यक्रम में 154 परिवारों की मातृशक्ति ने सहभागिता करते हुए अपने हाथों से भोजन बनाकर शिक्षार्थियों को स्नेहपूर्वक परोसा तथा उनके साथ बैठकर भोजन किया। कार्यक्रम के पश्चात स्वयंसेवकों द्वारा प्रत्येक परिवार को पर्यावरण संरक्षण के संदेश स्वरूप पौधे भेंट किए गए।


मंदसौर में संघ शिक्षा वर्ग : मातृहस्त भोजन से संस्कारों का संदेश, पथ संचलन ने आकर्षित किया नगर

जनमत जागरण @ मंदसौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) मंदसौर में शनिवार को मातृहस्त भोजन कार्यक्रम एवं पथ संचलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में 154 परिवारों की मातृशक्ति ने सहभागिता करते हुए स्वयंसेवकों के लिए अपने हाथों से भोजन तैयार किया तथा उनके साथ बैठकर भोजन किया।

कार्यक्रम के पश्चात स्वयंसेवकों ने प्रत्येक परिवार को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधे भेंट किए और उनसे वृक्षारोपण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रखने का आग्रह किया।

परिवारजनों की गोष्ठी को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री सुनील सुखदेव भाई मेहता ने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष समाज की सज्जन शक्ति को जोड़कर राष्ट्र निर्माण का वातावरण तैयार करने का अवसर है। उन्होंने पंच परिवर्तन—कुटुंब प्रबोधन, समरसता, पर्यावरण, स्व-जागरण एवं नागरिक कर्तव्य—को वर्तमान समाज की आवश्यकता बताया।

उन्होंने कहा कि भारतीय कुटुंब व्यवस्था हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है। परिवारों में संवाद की कमी और मोबाइल-टीवी की बढ़ती प्रवृत्ति सामाजिक दूरी बढ़ा रही है। प्रत्येक परिवार को एक समय साथ बैठकर भोजन करने और भोजन के समय मोबाइल व टीवी बंद रखने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर भी बल दिया। जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम उपयोग और भारतीय जीवनशैली अपनाने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि समाज परिवर्तन की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से करनी होगी।

कार्यक्रम में संत शिरोमणि रविदास जी की प्रेरक कथा श्री पीयूष शर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई।

इसके पूर्व प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षार्थियों द्वारा अनुशासित पथ संचलन निकाला गया। घोष की ध्वनि, एक समान वेशभूषा और हाथों में दंड लेकर कदमताल करते स्वयंसेवकों ने नगरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। संचलन वर्ग स्थल से प्रारंभ होकर महारानी लक्ष्मीबाई चौराहा तक पहुंचा और पुनः वर्ग स्थल पर सम्पन्न हुआ।

संघ शिक्षा वर्ग का यह आयोजन समाज में संस्कार, समरसता, पर्यावरण चेतना और राष्ट्रभाव जागृत करने वाला प्रेरक आयोजन बनकर सामने आया।

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