8 दिन में 24 से अधिक गायों की मौत – लहसुन-प्याज या पागल कुत्ते का कहर? नगर परिषद पर उठे गंभीर सवाल

सोयतकलां (जनमत जागरण)।
नगर की शांत गलियों में इन दिनों पसरा सन्नाटा केवल गर्मी का नहीं, बल्कि गायों की रहस्यमयी मौतों का साया है। पिछले 8 दिनों में दो दर्जन से अधिक गायें तड़प-तड़प कर मर गईं, और अब तक किसी को ये समझ नहीं आ रहा कि इनकी मौत के पीछे असली कारण क्या है। प्रशासन का दावा है कि गर्मी और प्याज-लहसुन के छिलकों से फूड प्वाइजन हो रहा है, जबकि स्थानीय लोग इसे पागल कुत्ते का असर बता रहे हैं, जिसने लगभग 20 से 25 दिन पहले दर्जनों गायों और आम नागरिकों आशीष गुप्ता को काटा था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद को इस पागल कुत्ते की जानकारी समय रहते दी गई थी, फिर भी दो – तीन दिन तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नगरवासियों के अनुसार, पिछले आठ दिन से मौसम में एकदम बदलाव आया ओर उस पागल कुत्ते के काटने से अब गायों में रैबीज़ जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं – काटने की प्रवृत्ति, झाग निकलना और तड़पकर मरना।
नगर परिषद के सीएमओ देवेंद्र वत्स ने जनमत जागरण को बताया कि प्रतिदिन दो-तीन गायों की मौत की सूचना मिल रही है और उनकी अंतिम क्रिया की जा रही है। साथ ही उन्होंने एक पशु चिकित्सक के हवाले से यह भी कहा कि गर्मी के कारण गायें लहसुन-प्याज के छिलकों का अधिक सेवन कर रही हैं, जिससे उन्हें फूड प्वाइजन हो रहा है। लेकिन क्या यह केवल एक अनुमान है या इससे प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी से बचना चाह रहा है?
नगरवासियों का गुस्सा फूट रहा है।
आशीष गुप्ता (सोयतखुर्द) ने बताया कि पागल कुत्ते के काटने का इलाज किया है । नगर वासियों का कहना है कि उसी पागल कुत्ते काटने के कारण ये मौतें हो रही हैं। पवन शर्मा (पान वाले) और दिनेश गुप्ता (संजय मेडिकल) ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नगर परिषद कर्मचारीयों को पहले ही सूचित किया था, लेकिन “जब कुत्ता काट चुका, तब जागे कर्मचारी!”
घनश्याम भावसार और विधायक प्रतिनिधि अशोक राठौर ने बताया कि बीती शनिवार रात 8:30 बजे एक और पागल कुत्ते जैसे केड़े ने 30-40 लोगों पर हमला किया और नगर परिषद को सूचना देने के एक घंटे बाद ही कर्मचारी आए। तब तक उसका मुंह झाग से भर चुका था।
जब इस संबंध में नायब तहसीलदार राजेश श्री माल से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मैं अभी बात करता हूं।
यह लापरवाही नहीं तो और क्या है?
गायों की मौत का यह सिलसिला कब थमेगा?
क्या नगर परिषद जांच करवाएगी या केवल अनुमान के सहारे लोगों को भ्रमित करती रहेगी?
जब तक मौत के असली कारण का खुलासा नहीं होता, यह प्रश्न नगर प्रशासन पर एक गहरा प्रश्नचिन्ह बनकर खड़ा रहेगा –
“क्या नगर की गौमाता की मौतों के लिए कोई ज़िम्मेदार भी है, या सब केवल बयानवीर हैं?”



