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“गायों की मौत का सिलसिला थमा नहीं, अब पॉलीथीन बना काल—रेबीज का भी खतरा!”

“एक ओर पॉलीथीन से फूड पॉइजन, दूसरी ओर पागल जानवरों का डर—नगर की चुप्पी सबसे खतरनाक!”

“सोयतकलां में गौमृत्यु का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा—8 दिन में दो दर्जन से अधिक गायों की मौत के बाद, सोमवार को भी दो और गायों ने दम तोड़ दिया।”
“और आज, जब एक मृत गाय का पोस्टमार्टम हुआ, तो गाय के पेट से निकली लगभग 40 किलो पॉलीथीन!” “इसी बीच नगर में एक काले रंग का आक्रामक केड़ा भी मिला, जिसमें रेबीज जैसे लक्षण दिखाई दिए—लगातार लार बहना, अत्यधिक हिंसक व्यवहार—जिसे विशेषज्ञों ने खतरनाक संकेत माना है। यह दोनों घटनाएं बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।”


जनमत जागरण @ सोयतकलां

नगर के पशु चिकित्सालय के डॉक्टर दीपक मेहरा ने जानकारी दी कि आज सुबह एक मृत गाय का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें करीब 40 किलो पॉलीथीन मिली। यह देखकर साफ हो गया कि गाय की मौत पॉलीथीन खाने से हुई है।
डॉ. मेहरा ने कहा, “इतनी मात्रा में पॉलीथीन कोई सामान्य बात नहीं है, यह नगर की लचर सफाई व्यवस्था की मार्मिक निशानी है।”

इसी के साथ, डॉ. मेहरा ने एक काले रंग के केड़े की भी जांच की है जिसे नगर परिषद कर्मचारियों ने काफी प्रयासों के बाद पकड़ा। केड़े में रेबीज जैसे लक्षण पाए गए—आक्रामकता, मुंह से अत्यधिक लार, और अनियंत्रित हरकतें।
यह रिपोर्ट उन्होंने डिप्टी डायरेक्टर, पशु चिकित्सा आगर को भेज दी है।


विचलित करने वाला यह दृश्य धुंधला (blur) किया गया है । “यह दृश्य हम दिखाना नहीं चाहते… लेकिन अब चुप रहना भी एक अपराध है।”आज सोयत नगर में एक गौमाता का पोस्टमार्टम हुआ।उसके पेट से निकलीं लगभग 40 किलो पॉलिथीन की थैलियाँ। यह वो थैलियाँ हैं, जो हम सब्ज़ियों के छिलकों में बाँधकर फेंकते हैं…और यह वो मौन हत्या है, जिसमें हम सब शामिल हैं।यह पोस्टमार्टम की तस्वीर हृदय विदारक है।हम इसे साझा नहीं करना चाहते थे, लेकिन अब ज़रूरी हो गया है – समाज को सच्चाई का सामना कराना।

“यह सिर्फ व्यवस्था की बात नहीं है, यह जीवदया की संवेदना है।”


(सार्थक संपादकीय दृष्टिकोण):

गाय की मौत अब खबर नहीं रही, यह समाज और सिस्टम लापरवाही का आईना बन चुकी है।
एक ओर डॉक्टर पॉलीथीन से मौत की पुष्टि कर रहे हैं, दूसरी ओर केड़ों में रेबीज जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं—


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“हर थैली एक हत्या है: कचरे में दम तोड़ती गौमाता की करुण पुकार”–”इस पीड़ा में डूबा यह सार्थक चिंतन अवश्य पढ़ें – लेखक: राजेश कुमरावत ‘सार्थक’”

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