‘सार्थक’ दृष्टिकोण
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1997 से 2026 : छात्र आंदोलन से शिक्षा मंत्रालय तक, धर्मेंद्र प्रधान के निर्णय ने भारतीय लोकतंत्र को क्या संदेश दिया?
विशेष विश्लेषण – लेखक : राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ भारत में शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि…
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TCS धर्मांतरण केस: जमानत आदेश में भगवान श्रीकृष्ण का उल्लेख, न्यायालय की टिप्पणी पर नया विमर्श
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जनमत विश्लेषण व्यवस्था का एक्स-रे: एक प्रदेश, दो अस्पताल—कहीं डॉक्टर बिना अस्पताल, कहीं अस्पताल बिना डॉक्टर।
मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे बड़ा विरोधाभास जनमत जागरण विश्लेषण व्यवस्था का एक्स-रे @ दीपक जैन सुसनेर “जब…
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रणवीर सिंह का “बॉयकॉट” या बदलते भारत से भय? लेखक राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
लेखक : राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ भारत केवल एक राजनीतिक राष्ट्र नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना का जीवंत स्वरूप…
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विचार जो समाज को जागृत करें – समय से सवाल, समाज को दिशा : पढ़िए विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित विचारोत्तेजक लेख एवं समाचार ✍️ लेखक : राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ स्वतंत्र लेखक एवं वैचारिक चिंतक
विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित विचारोत्तेजक लेख एवं समाचार कटिंग्स 👇 डिग्रियों के जंगल में खोता कौशल…
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भोजशाला का निर्णय : केवल एक परिसर नहीं, सांस्कृतिक आत्मा की पुनर्प्रतिष्ठा ✍️ लेखक: राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
🚩सदियों के संघर्ष के बाद धार की भोजशाला में गूंजा सांस्कृतिक न्याय का स्वर 🚩जहां कभी गूंजते थे संस्कृत के…
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हिंदुत्व की लहर या सत्ता की सुनामी—बंगाल ने क्या संदेश दिया? कमल की लहर में हिंदुत्व की धार, बंगाल ने बदला रुख- समसामयिकी विश्लेषण | राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
▪️34 साल वाम और डेढ़ दशक तृणमूल के बाद भाजपा का तेज़ उभार, पहचान, सुरक्षा और योजनाओं का दिखा असर▪️लाल…
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गेहूं खरीदी पर असमंजस:“सरकार अगर गेहूं नहीं खरीदना चाहती, तो कम से कम सच बोलने का साहस तो दिखाए!”- रमेश दांगी किसान संघ के प्रदेश महामंत्री ने कहा
पढ़ें – सार्थक दृष्टिकोण | संपादक की कलम से किसान खेत में, सरकार ‘कन्फ्यूजन मोड’ में — गेहूं खरीदी या…
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कर्ण की पीड़ा और कृष्ण का धैर्य… इसी मार्ग ने गढ़ा अंबेडकर का व्यक्तित्व, सोयतकलां में गूंजा संदेश
सोयतकलां में बाबा साहेब अंबेडकर जयंती पर हुआ विचार संगम, समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का संकल्प दोहराया ✍️…
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आशा भोसले ‘ताई’ : “अभी ना जाओ छोड़ कर…” की गूंज में नम आंखें | सुरों की अनमोल विरासत को श्रद्धांजलि
▪️राष्ट्र और संस्कृति के बीच सेतु बनी आवाज़जिसने हर पीढ़ी को एक सूत्र में जोड़ा समसामयिकी लेखक – राजेश कुमरावत…
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