सुसनेर में गूंजे ‘जय परशुराम’ के जयकारे | निकली ऐतिहासिक रैली, नगर हुआ धर्ममय

भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर ब्राह्मण समाज ने दिखाया एकता, परंपरा और संस्कृति का संगम
जनमत जागरण @ सुसनेर : अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर बुधवार को सुसनेर नगर में ब्राह्मण समाज द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव भव्य श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज के युवाओं ने भगवा ध्वजों और जयकारों के साथ एक ऐतिहासिक वाहन एवं बाइक रैली निकाली, जिसने नगर को धर्ममय बना दिया।
तहसील रोड स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर से प्रारंभ हुई यह रैली नगर के प्रमुख मार्गों—मंडी चौराहा, डाक बंगला, महाराणा प्रताप चौराहा, पांच पुलिया, पुराना बस स्टैंड, हाथी दरवाजा, शुक्रवारिया बाजार, सराफा बाजार, इतवारिया बाजार व सब्जी मंडी होते हुए श्रीराम मंदिर धर्मशाला तक पहुँची। मार्ग में अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर नागरिकों ने रैली का भव्य स्वागत किया।
रैली में शामिल सभी युवक पारंपरिक परिधान में सज्जित थे और ‘जय परशुराम’ के घोष से नगर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। धर्मशाला पहुंचने पर भगवान श्रीराम और भगवान परशुराम की वैदिक रीति से पूजा-अर्चना की गई। पूजन कार्यक्रम पं. वेदप्रकाश भट्ट एवं पं. मनोज शर्मा के सान्निध्य में मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। इसके उपरांत महाआरती और प्रसादी वितरण हुआ।
नगरभर में हुआ भव्य स्वागत | जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने दिखाया समर्पण
रैली के स्वागत में सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। स्वागत करने वालों में प्रमुख रूप से:
- पूर्व विधायक राणा विक्रम सिंह
- भाजपा मंडल अध्यक्ष सजन सिंह कलारिया
- भाजपा जिला महामंत्री डॉ. गजेन्द्र सिंह चन्द्रावत
- कांग्रेस नेता विष्णु पाटीदार, आशिक हुसैन बोहरा
- विधायक प्रतिनिधि राणा चित्तरंजन सिंह
- समाजसेवी द्वारकादास लड्डा, योगेश पांडे, प्रेम राठौर, प्रदीप बजाज, राकेश अग्रवाल, बंटी विघार्थी आदि शामिल रहे।

संस्कृति, परंपरा और एकता का संदेश | समाज की नई पीढ़ी ने दिखाया उत्साह
ब्राह्मण समाज द्वारा किए गए इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि सांस्कृतिक एकता और परंपराओं के संरक्षण का भी संदेश दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने रैली में भाग लेकर समाज की जड़ों से जुड़ने का परिचय दिया।
आयोजकों का कहना है कि भगवान परशुराम केवल ब्राह्मण समाज के ही नहीं, अपितु समस्त सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं, जो धर्म, शौर्य और न्याय के प्रतिनिधि रूप में पूजनीय हैं।
नगरवासियों ने इस अनुशासित और प्रेरणादायक आयोजन की सराहना की और भविष्य में भी इसी प्रकार सामाजिक समरसता और परंपराओं को जीवंत रखने का संकल्प दोहराया।



