“जिसके जीवन में समय का मोल है, उसका जीवन अनमोल” – मुनि सागर जी

अष्टान्हिका महापर्व में श्री त्रिमूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहा सिद्धचक्र मण्डल विधान, श्रद्धालु कर रहे आत्मकल्याण की साधना
जनमत जागरण @ सुसनेर (आगर-मालवा)। जैन धर्मावलम्बियों के परम पुण्योपार्जक महापर्व अष्टान्हिका के पावन अवसर पर सुसनेर नगर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है। नेशनल हाईवे स्थित श्री त्रिमूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर में सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान और पुण्यार्जक अनिल कुमार- कमलेश कुमार जैन एसएम परिवार के सौजन्य से दस दिवसीय सिद्धचक्र मण्डल विधान का भव्य आयोजन चल रहा है।
यह आयोजन समाधिस्थ मुनि ब्रह्मानन्द सागर जी व दर्शन सागर जी के आशीर्वाद और समाधिस्थ मुनि भूतबलि सागर जी के शिष्य मुनि मौन सागर जी महाराज के ससंघ पावन सानिध्य में सम्पन्न हो रहा है। मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री मुनि सागर जी ने कहा –
“इंसान जीवन भर पापों का बोझ बढ़ाता है। यदि कुछ समय पाप धोने के लिए निकाल ले तो जीवन धन्य हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान और पर्व हमें सम्यक्त्व की ओर ले जाते हैं और सम्यकत्व से ही जीवन में योग्यता आती है। समय को मूल्य दीजिए, क्योंकि जिसके जीवन में समय का मोल है, उसका जीवन अनमोल है।”

🌸 इंद्र-इंद्राणियों ने किया 512 अर्घ्य समर्पण
समाज के दीपक जैन (पत्रकार) ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्यनियम पूजन और मण्डल विधान का संगीतमय पूजन किया जा रहा है। ब्रह्मचारी मंजुला दीदी के निर्देशन और पण्डित खुमानसिंह जैन, मुकेश शास्त्री एवं विधानाचार्य अशोक जैन मामा के मार्गदर्शन में यह अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हो रहा है।
मंगलवार को 300 से अधिक इंद्र-इंद्राणियों ने सिद्ध भगवान की आराधना कर 512 अर्घ्य समर्पित किए। बुधवार को 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। साथ ही विश्वशांति की कामना हेतु सवा लाख मंत्रों का जाप भी जारी है। आयोजन का समापन 10 जुलाई को विश्व शांति महायज्ञ और मुनि संघ के चातुर्मास कलश स्थापना के साथ होगा।

🌙 रात्रि में भजनों की रसधारा, प्रवचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
श्री त्रिमूर्ति मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक जैन मामा ने बताया कि प्रतिदिन रात्रि में संगीतकार हरीश कुमार एंड पार्टी के सुमधुर भजनों के साथ भगवान जिनेंद्र की आरती की जा रही है। इसके बाद ब्रह्मचारी मंजुला दीदी के प्रवचन और समाज की महिलाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं। अंशुल जैन एंड पार्टी, टीकमगढ़ के कलाकार जैन दर्शन से जुड़ी नाटिकाओं का प्रभावशाली मंचन कर रहे हैं, जो समाजजन में नई चेतना का संचार कर रहा है।
✍️ जनमत जागरण का दृष्टिकोण
अष्टान्हिका महापर्व का यह आयोजन न केवल आत्मकल्याण का माध्यम है, बल्कि जैन समाज की आस्था, एकता और संस्कृति का जीवंत उदाहरण भी है। यह पर्व स्मरण दिलाता है कि धर्म और समय का सदुपयोग ही जीवन को सार्थक बनाता है।



