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कर्ण की पीड़ा और कृष्ण का धैर्य… इसी मार्ग ने गढ़ा अंबेडकर का व्यक्तित्व, सोयतकलां में गूंजा संदेश

सोयतकलां में बाबा साहेब अंबेडकर जयंती पर हुआ विचार संगम, समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का संकल्प दोहराया

✍️ महाभारत के प्रसंग में कर्ण और कृष्ण के जीवन का उदाहरण देते हुए यह संदेश दिया गया कि परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारा दृष्टिकोण ही हमारे भविष्य का निर्माण करता है—इसी विचार ने सोयतकलां में अंबेडकर जयंती कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

📰 जनमत जागरण @ सोयतकलां

मुख्य वक्ता पूर्व जिला अध्यक्ष चिंतामण राठौर ने अपने उद्बोधन में महाभारत के कर्ण और भगवान कृष्ण के जीवन प्रसंग को सामने रखते हुए श्रोताओं को गहराई से समझाया। उन्होंने कहा कि कर्ण के पास भी विकल्प थे, लेकिन उन्होंने अपने घावों को कभी भरने नहीं दिया और भीतर क्रोध, पीड़ा और नफरत को स्थान दिया, जिसका परिणाम उनके पतन के रूप में सामने आया। वहीं भगवान कृष्ण ने जन्म से ही विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन धैर्य, धर्म और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़े और युगों-युगों तक पूजनीय बने।

राठौर ने इसी संदर्भ में कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने भी अपने जीवन में अनेक कष्ट सहे, बचपन में जुल्म और भेदभाव झेला, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। इसी दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के कारण आज वे विश्वभर में आदर्श के रूप में स्थापित हैं।

14 अप्रैल को सोयतकलां मंडल द्वारा अटल उद्यान, माधव चौक में बाबा साहेब अंबेडकर जयंती का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें भाजपा जिला अध्यक्ष ओम मालवीय, जिला उपाध्यक्ष अजय जैन, भारत सिंह चौहान, मंडल अध्यक्ष अमित नागर, सांसद प्रतिनिधि गिरिराज गुप्ता एवं कार्यक्रम संयोजक प्रकाश जाटव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जिला अध्यक्ष ओम मालवीय ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब के सिद्धांतों और लक्ष्यों को केंद्र और राज्य सरकार अक्षरशः पूरा करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दलित, शोषित, पीड़ित और वंचित वर्ग के उत्थान को ध्यान में रखते हुए सरकार अंत्योदय और एकात्म मानवतावाद के सिद्धांत पर योजनाएं बना रही है।

कार्यक्रम का संचालन राजेश राठौर ने किया एवं आभार कैलाश मालवीय ने माना।

कार्यक्रम के अंत में नगर में कुछ दिन पूर्व मधुमक्खियों के हमले में दिवंगत हुए चौथी कक्षा के छात्र रमन कराड़ा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिससे पूरा वातावरण भावुक हो गया।


🟡 “सार्थक दृष्टिकोण”
संघर्ष हर युग में रहा है, लेकिन इतिहास उन्हीं का बना है जिन्होंने अपने दर्द को दिशा दी—कर्ण की तरह पीड़ा में डूबकर नहीं, बल्कि कृष्ण की तरह उसे संकल्प में बदलकर आगे बढ़े।
बाबा साहेब अंबेडकर ने भी अपमान और अभाव के बीच अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया, उन्होंने अपने संघर्ष को समाज परिवर्तन का आधार बनाया और एक नई व्यवस्था को जन्म दिया।

आज के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में जब गुटबाजी, व्यक्तिगत स्वार्थ और आपसी अविश्वास की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है, तब यह प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम किस मार्ग पर चल रहे हैं।
जब कार्यकर्ता ही अपने संगठन और विचारधारा से भटकने लगते हैं, जब व्यक्तिगत लाभ सामूहिक उद्देश्य पर हावी होने लगता है, तब वह स्थिति किसी भी व्यवस्था को भीतर से कमजोर कर देती है।

यह समय आत्ममंथन का है—क्या हम कर्ण की तरह परिस्थितियों को दोष देकर बिखरेंगे, या कृष्ण और बाबा साहेब की तरह धैर्य, निष्ठा और सिद्धांतों के साथ खड़े रहेंगे?
सच्ची राजनीति और सच्चा सामाजिक कार्य वही है, जहां व्यक्ति नहीं, विचार बड़ा होता है; पद नहीं, उद्देश्य महत्वपूर्ण होता है; और स्वार्थ नहीं, समाज सर्वोपरि होता है—यही आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ✍️ सार्थक चिंतन | राजेश कुमरावत ‘सार्थक

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