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त्योहार की रौनक पर तंगी का साया चार माह से वेतन से वंचित – 4 माह से वेतन के बिना तंगी में सिविल अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारी


सिविल अस्पताल : आउटसोर्स कर्मचारियों के घरों में सन्नाटा, बहनों के लिए राखी का तोहफ़ा भी सपना

“मरीजों की सेवा में दिन-रात खड़े ये कर्मचारी, लेकिन वेतन देने वाली एजेंसी और जिम्मेदार विभाग दोनों चुप हैं… चार माह से सुसनेर सिविल अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारी तंगी में हैं। रक्षा बंधन पर बहनों की कलाई सूनी है, घर का चूल्हा ठंडा और बच्चों की पढ़ाई अधर में लटकी हुई है। सेवा का जज़्बा अब पेट की भूख और जेब की खालीपन के सामने हार मानता दिख रहा है।

पढ़ें, इसी पर आधारित हमारी यह संवेदनशील रिपोर्ट।

सुसनेर। जिस अस्पताल में ये कर्मचारी दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे हैं, वहीं उनके अपने घरों में त्यौहार की रौनक बुझ चुकी है। सुसनेर सिविल अस्पताल के एक दर्जन से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 4 माह से वेतन के इंतज़ार में हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि रक्षा बंधन जैसे पावन अवसर पर भी बहनों के लिए उपहार खरीदना तो दूर, घर में राशन तक जुटाना कठिन हो गया है।

कर्मचारी अमन सेन, मुकेश चौहान, भेरूलाल मालवीय, मोहनलाल मेघवाल, राहुल प्रजापत, राहुल गेहलोत, राहुल पंवार, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ममता परमार, पूजा गेहलोत, ओजस्व नन्दावत और आवेश लबाना ने बताया कि वे इंदौर स्थित रियल सिक्योरिटी एंड हाउसकीपिंग कंपनी के अधीन पिछले 7 माह से सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन 4 माह से वेतन का अता-पता नहीं है। जो वेतन पहले मिला, वह भी तय राशि से कम और अलग-अलग दिया गया। पीएफ जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अब तक शुरू नहीं हुईं।

आगर, बडौद, तनोडिया, सोयत और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले इन कर्मचारियों में कोई रोजाना निजी वाहन से लंबा सफर तय करता है, तो कोई किराए के कमरे में रहकर ड्यूटी निभाता है। वेतन न मिलने से किराए और बच्चों की फीस का बोझ सिर पर है, त्योहार की खुशियां पूरी तरह फीकी हो चुकी हैं।

👉 “दिन भर अस्पताल में मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन अपने घर में बच्चों के दूध के पैसे तक नहीं हैं…राखी के दिन बहन के हाथ खाली देखकर क्या जवाब दूँगा?” — आउटसोर्स कर्मचारी, सुसनेर सिविल अस्पताल

शुक्रवार को कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से प्रभारी सीबीएमओ डॉ. बी.बी. पाटीदार को ज्ञापन सौंपकर तत्काल भुगतान की मांग की।
प्रभारी बीएमओ डॉ. पाटीदार ने कहा— “कर्मचारियों की समस्या से वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित कंपनी को अवगत करा दिया गया है, जल्द भुगतान कराने के प्रयास हो रहे हैं।”


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😢 “सोयतकलां की सीमा ने साबित किया – बहन सिर्फ राखी नहीं, जिंदगी भी दे सकती है”


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